प्रदेश में सड़कों की जर्जर हालत अब महज तकनीकी समस्या नहीं रह गई है, बल्कि यह प्रशासनिक लापरवाही का संकेत बनती जा रही है। Road Quality Inspection Halted की स्थिति यह है कि बीते करीब एक साल से लोक निर्माण विभाग द्वारा सड़क गुणवत्ता की नियमित जांच लगभग ठप पड़ी हुई है। जिम्मेदार अधिकारी अपने-अपने जोन के कार्यभार में इस कदर उलझे हैं कि क्रॉस-जोन निरीक्षण की व्यवस्था व्यवहार में उतर ही नहीं पा रही।
Zonal Inspection System बना कागजी व्यवस्था
गुणवत्ता जांच को निष्पक्ष बनाने के उद्देश्य से विभाग ने जोन आधारित निरीक्षण प्रणाली लागू की थी। (Zonal Inspection System) के तहत एक जोन के अधिकारी दूसरे जोन की सड़कों की जांच करेंगे, ताकि मिलीभगत की गुंजाइश न रहे। इस टीम में प्रमुख अभियंता से लेकर कार्यपालन अभियंता तक को शामिल किया गया, लेकिन समय और संसाधन के अभाव में यह व्यवस्था फाइलों तक ही सीमित रह गई।
Material Testing Labs रही निष्क्रिय
निगरानी के ठप पड़ने का सीधा असर निर्माण सामग्री की जांच पर भी पड़ा। (Material Testing Labs) लंबे समय तक निष्क्रिय रहीं, जिससे सीमेंट, रेत, गिट्टी और बिटुमिन की गुणवत्ता का तकनीकी परीक्षण नहीं हो सका। नतीजा यह रहा कि कई जगह नई बनी सड़कें कुछ ही दिनों में उखड़ती नजर आईं।
24 घंटे में खराब हुई सड़कें, फिर भी सबक नहीं
हाल के महीनों में कई ऐसे मामले सामने आए, जहां करोड़ों रुपये की लागत से बनी सड़कें 24 घंटे के भीतर ही खराब हो गईं। (Poor Road Construction Cases) की जांच के बाद कुछ अधिकारियों पर कार्रवाई जरूर हुई, लेकिन सिस्टम में ठोस सुधार अब तक नहीं दिखा।
हजारों किलोमीटर सड़कें, निगरानी सीमित
लोक निर्माण विभाग के अधीन प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्य मार्ग, मुख्य और ग्रामीण सड़कों सहित हजारों किलोमीटर का नेटवर्क है। इसी वित्तीय वर्ष में सैकड़ों किलोमीटर नई सड़कें बनीं, लेकिन बदली हुई जांच प्रणाली के चलते इनकी नियमित गुणवत्ता जांच नहीं हो सकी।
Central PWD Lab बंद, तकनीकी जांच ठप
रायपुर स्थित पीडब्ल्यूडी की केंद्रीय प्रयोगशाला भी करीब एक साल से बंद पड़ी है। (Central PWD Lab Issue) के कारण उन्नत तकनीकी परीक्षण पूरी तरह प्रभावित हुआ है। विभाग भले ही निरंतर मॉनिटरिंग का दावा करता हो, लेकिन जमीनी हालात इन दावों पर सवाल खड़े करते हैं।
भविष्य में बढ़ सकता है जोखिम
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते निरीक्षण और गुणवत्ता जांच की प्रक्रिया को दुरुस्त नहीं किया गया, तो इसका असर सिर्फ सड़कों पर नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा, दुर्घटनाओं और सरकारी नुकसान पर भी पड़ेगा।


