सीजी भास्कर, 28 दिसंबर। बस्तर अंचल की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, लोकपरंपराओं और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण व संवर्धन की दिशा में एक बार फिर ऐतिहासिक पहल होने जा रही है। वर्ष 2026 में बस्तर पंडुम 2026 (Bastar Pandum 2026) का आयोजन पूर्व वर्ष की तरह और अधिक भव्य, सुव्यवस्थित व आकर्षक रूप में किया जाएगा। इसकी तैयारियों को लेकर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में उच्चस्तरीय बैठक आयोजित हुई, जिसमें आयोजन की रूपरेखा, कार्यक्रम संरचना और सहभागिता विस्तार पर गहन चर्चा की गई।
बैठक में बताया गया कि बस्तर पंडुम 2026 (Bastar Pandum 2026) का आयोजन तीन चरणों में किया जाएगा। पहले चरण में 10 से 20 जनवरी 2026 तक जनपद स्तरीय कार्यक्रम होंगे, दूसरे चरण में 24 से 30 जनवरी 2026 तक जिला स्तरीय आयोजन किया जाएगा, जबकि तीसरे और अंतिम चरण में 1 से 5 फरवरी 2026 तक संभाग स्तरीय महोत्सव आयोजित होगा। यह चरणबद्ध आयोजन बस्तर की जमीनी संस्कृति को गांव से लेकर संभाग स्तर तक सशक्त मंच प्रदान करेगा।
इस वर्ष आयोजन की विशेषता यह होगी कि प्रतियोगी एवं प्रदर्शनीय विधाओं की संख्या 7 से बढ़ाकर 12 कर दी गई है। इनमें जनजातीय नृत्य, गीत, नाट्य, पारंपरिक वाद्ययंत्र, वेशभूषा एवं आभूषण, पूजा-पद्धति, शिल्पकला, चित्रकला, जनजातीय पेय पदार्थ, पारंपरिक व्यंजन, आंचलिक साहित्य और वन-औषधि को शामिल किया गया है। इससे न केवल कलाकारों को अधिक अवसर मिलेंगे, बल्कि बस्तर की विविध सांस्कृतिक पहचान भी व्यापक रूप में सामने आएगी।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बस्तर पंडुम 2026 (Bastar Pandum 2026) को गरिमामय, समावेशी और सुव्यवस्थित ढंग से आयोजित किया जाए, ताकि बस्तर की असली आत्मा और जनजातीय जीवन-दर्शन देश-दुनिया तक पहुंच सके। उन्होंने कहा कि यह आयोजन केवल सांस्कृतिक उत्सव नहीं, बल्कि बस्तर की पहचान, स्वाभिमान और परंपराओं का जीवंत दस्तावेज है।
बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि इस बार बस्तर पंडुम का लोगो, थीम गीत और आधिकारिक वेबसाइट का विमोचन मां दंतेश्वरी मंदिर प्रांगण में किया जाएगा। इस अवसर पर वरिष्ठ मांझी–चालकी, गायता–पुजारी, आदिवासी समाज के प्रमुखजन और पद्म सम्मान से सम्मानित कलाकारों की सहभागिता प्रस्तावित है। साथ ही भारत के विभिन्न देशों में कार्यरत भारतीय राजदूतों को आमंत्रित करने पर भी सहमति बनी, ताकि वे बस्तर की सांस्कृतिक विरासत, जनजातीय जीवनशैली और परंपराओं से प्रत्यक्ष रूप से परिचित हो सकें।
इसके अतिरिक्त बस्तर संभाग से जुड़े उच्च पदस्थ अधिकारी, यूपीएससी व सीजीपीएससी में चयनित अधिकारी, चिकित्सक, अभियंता, वरिष्ठ जनप्रतिनिधि और देश के विभिन्न राज्यों के जनजातीय नृत्य दलों को भी आमंत्रित किया जाएगा। प्रतिभागियों के पंजीयन की व्यवस्था इस वर्ष ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से की जाएगी, जिससे अधिकाधिक कलाकारों और सांस्कृतिक समूहों की सहभागिता सुनिश्चित हो सके।
उल्लेखनीय है कि यह आयोजन बस्तर संभाग के सात जिलों की 1,885 ग्राम पंचायतों, 32 जनपद पंचायतों, 8 नगरपालिकाओं, 12 नगर पंचायतों और एक नगर निगम क्षेत्र में तीन चरणों में संपन्न होगा। संस्कृति एवं राजभाषा विभाग को आयोजन का नोडल विभाग बनाया गया है, जो समन्वय और क्रियान्वयन की जिम्मेदारी निभाएगा।
बैठक में उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल, संस्कृति सचिव रोहित यादव, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, संचालक विवेक आचार्य सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।


