सीजी भास्कर, 31 दिसंबर। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले से नकली नोटों का एक चौंकाने वाला मामला (Fake Currency Case) सामने आया है। बढ़ते कर्ज और आर्थिक तंगी से जूझ रहे रायपुर निवासी पति-पत्नी ने अपराध का रास्ता चुना और यूट्यूब से सीख लेकर नकली करेंसी छापना शुरू कर दिया। आरोपियों ने साप्ताहिक बाजारों में छोटे व्यापारियों को निशाना बनाते हुए नकली नोट चलाए, लेकिन सतर्कता के चलते उनकी चाल ज्यादा दिन नहीं चल सकी।
ऐसे रची गई नकली नोटों की साजिश
जांच में सामने आया है कि आरोपी दंपती—अरुण कुमार तुरंग (50) और राखी तुरंग (40)—ने ऑनलाइन माध्यम से मशीन मंगाई और 500, 200 व 100 रुपये के नकली (Fake Currency Case) नोट छापे। नोटों को असली जैसा दिखाने के लिए उन पर मिट्टी लगाई जाती थी, ताकि वे पुराने चलन वाले नोटों की तरह लगें। भीड़भाड़ वाले साप्ताहिक बाजारों में इस तरकीब से नोट खपाने की कोशिश की गई।
व्यापारियों की सतर्कता से खुला राज
हालांकि, कुछ व्यापारियों को नोटों की प्रिंट क्वालिटी और छूने पर अलग एहसास होने से शक हुआ। लेन-देन के दौरान असामान्य रंग और कागज की गुणवत्ता ने उनकी शंका को पुख्ता किया, जिसके बाद तुरंत पुलिस को सूचना दी गई।
पुलिस की कार्रवाई, बड़ी बरामदगी
सूचना मिलते ही पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दंपती को रंगे हाथों पकड़ा। इसके बाद रायपुर स्थित उनके घर की तलाशी ली गई, जहां से कलर फोटो-कॉपी मशीन, विशेष कागज और 1,65,300 रुपये के नकली नोट बरामद किए गए। बाजार में पहले से चलाए गए 5,200 रुपये जोड़कर कुल 1,70,500 रुपये की जाली करेंसी जब्त की गई।
साप्ताहिक बाजारों में बढ़ी चिंता
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि रानीतराई और पाटन के साप्ताहिक बाजारों में कई व्यापारियों को नकली नोट थमाए गए थे। घटना के बाद स्थानीय व्यापारियों में चिंता (Fake Currency Case) का माहौल है। उन्होंने बाजारों में निगरानी बढ़ाने, सीसीटीवी व्यवस्था मजबूत करने और संदिग्ध लेन-देन पर तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
जांच जारी, नेटवर्क खंगालने में जुटी पुलिस
पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और यह भी जांच की जा रही है कि कहीं इस गिरोह के तार किसी बड़े नेटवर्क से तो नहीं जुड़े हैं। अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए अपराध सीखने के मामलों पर अब और कड़ी नजर रखी जाएगी।


