सीजी भास्कर, 8 जनवरी। छत्तीसगढ़ में भारत स्काउट्स एंड गाइड्स की राष्ट्रीय रोवर-रेंजर जंबूरी (National Rover Ranger Jamboree) को लेकर चल रहा विवाद अब हाई कोर्ट (Chhattisgarh High Court Scouts Case) तक पहुंच गया है। सांसद बृजमोहन अग्रवाल की अध्यक्षता वाली परिषद द्वारा जंबूरी को रद्द करने और बाद में उन्हें अध्यक्ष पद से हटाए जाने को लेकर कानूनी लड़ाई शुरू हो गई है। बुधवार को बृजमोहन अग्रवाल ने हाई कोर्ट में रिट याचिका (Scout Jamboree Legal Case) दायर की।
यह याचिका वरिष्ठ अधिवक्ता किशोर भादुड़ी और अमितेश यादव के माध्यम से पेश की गई। इसमें कहा गया है कि उन्हें परिषद के अध्यक्ष पद से एकतरफा हटाया गया, जबकि न तो सुनवाई का अवसर दिया गया और न ही उनका पक्ष सुना गया। याचिका में यह भी कहा गया कि यह कार्रवाई संविधान के मूल सिद्धांतों और प्राकृतिक न्याय (Natural Justice Scouts) के खिलाफ है। सांसद बृजमोहन के अनुसार वरिष्ठता और अनुभव को नजरअंदाज करके यह निर्णय लिया गया, जो पद की गरिमा और संस्थागत प्रक्रिया के खिलाफ है।
इस विवाद की शुरुआत तब हुई जब परिषद की बैठक में राष्ट्रीय रोवर-रेंजर जंबूरी को वित्तीय अनियमितताओं (Rover Ranger Jamboree Controversy) के आरोपों के आधार पर रद्द करने का निर्णय लिया गया। परिषद के मुताबिक, आयोजन से जुड़े खर्च और व्यवस्थाओं में गड़बड़ियों की शिकायतें आई थीं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। हालांकि, राज्य आयुक्त ने परिषद के फैसले को भ्रामक बताया और कहा कि बालोद में प्रस्तावित जंबूरी नौ से 13 जनवरी तक आयोजित होगी।
इस बयान के बाद संगठन के भीतर दो अलग-अलग दावे सामने आए, जिससे स्थिति और जटिल हो गई। इस बीच यह भी सामने आया कि स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव को नया अध्यक्ष (Scouts Guides Council President) घोषित किया गया। इस बदलाव ने विवाद को और बढ़ा दिया और मामला राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया।
विशेषज्ञों का कहना है कि हाई कोर्ट की सुनवाई (Chhattisgarh Scouts Jamboree Case) इस विवाद का निर्णायक मोड़ होगी। अदालत यह तय करेगी कि परिषद का फैसला और अध्यक्ष पद से हटाने की प्रक्रिया कानूनन सही थी या नहीं। इस फैसले के बाद ही जंबूरी का आयोजन, वित्तीय आरोप और अध्यक्ष पद की वैधता को लेकर स्थिति स्पष्ट होगी।
संगठन और राजनीतिक गलियारों में सभी की नजर अब हाई कोर्ट पर टिकी हुई है। यह मामला केवल एक जंबूरी का नहीं बल्कि छत्तीसगढ़ में स्काउट्स एंड गाइड्स संस्थान की वैधानिक प्रक्रिया और नेतृत्व की स्थिरता (Scouts Guides Legal Dispute) के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अदालत का निर्णय आने के बाद ही संगठन और परिषद के बीच गतिरोध समाप्त होगा और आगामी कार्यक्रमों के लिए मार्ग स्पष्ट होगा।





