सीजी भास्कर, 08 जनवरी। छत्तीसगढ़ के गृहमंत्री विजय शर्मा ने बस्तर अंचल को लेकर बड़ा (Bastar Naxal Free Proposal) बयान देते हुए कहा है कि यहां के पांच गांवों को नक्सलमुक्त घोषित करने के लिए प्रस्ताव मांगा गया है। नक्सलमुक्त होते ही इन गांवों को विकास कार्यों के लिए प्रत्येक गांव को 1-1 करोड़ रुपये दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि पहले जहां नक्सल दहशत का माहौल था, आज वहां शांति है और बस्तर अब बदलाव की राह पर आगे बढ़ रहा है।
गृहमंत्री विजय शर्मा बीजापुर जिले के कुटरू गांव पहुंचे थे, जहां उन्होंने नियद नेल्लानार योजना के अंतर्गत पंचायतों के विकास को लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधियों और समाज प्रमुखों के साथ बैठक की। इस बैठक में बीजापुर जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों से आए ग्रामीण जनप्रतिनिधि और समाज प्रमुख—गायता, सिरहा, पुजारी, बैगा—मौजूद रहे।
बैठक के दौरान गृहमंत्री ने स्पष्ट कहा कि हिंसा के साथ विकास कभी संभव नहीं रहा है। उन्होंने कहा कि शासन की प्राथमिकता है कि बस्तर के हर गांव में शांति और खुशहाली (Bastar Naxal Free Proposal) पहुंचे। इसके लिए जरूरी है कि माओवादी विचारधारा के प्रभाव में आकर भटके युवा मुख्यधारा में लौटें, पुनर्वास का रास्ता अपनाएं और गांव व देश के विकास में अपनी भूमिका निभाएं।
विजय शर्मा ने बताया कि केतुलनार पेठा, मंगापेठा, रानी बोली, अंबेली और दरभा गांव नक्सलमुक्त होने की कगार पर हैं। इन गांवों को नक्सलमुक्त घोषित करने के लिए प्रस्ताव भेजने को कहा गया है, ताकि इन्हें इलवंद गांव के रूप में विकसित किया जा सके। नक्सलमुक्त घोषित होते ही इन सभी गांवों को बुनियादी सुविधाओं और विकास कार्यों के लिए 1-1 करोड़ रुपये की सहायता दी जाएगी।
उन्होंने कहा कि अब बस्तर में बम धमाकों की गूंज नहीं, बल्कि शांति का एहसास किया जा सकता है। सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी सुविधाओं को गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए सरकार लगातार काम कर रही है।
गौरतलब है कि इससे पहले Sukma जिले के बड़ेसट्टी गांव को नक्सलमुक्त घोषित (Bastar Naxal Free Proposal) किया जा चुका है। प्रशासन और पुलिस के अनुसार उस गांव में नक्सली गतिविधियां पूरी तरह खत्म हो चुकी हैं, जिसके बाद वहां विकास कार्यों के लिए 1 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई थी।
गृहमंत्री के इस बयान के बाद यह साफ संकेत मिल रहे हैं कि बस्तर में सुरक्षा के साथ-साथ विकास को समान प्राथमिकता दी जा रही है और नक्सल प्रभावित इलाकों को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में सरकार आक्रामक रणनीति पर काम कर रही है।


