सीजी भास्कर, 09 जनवरी। छत्तीसगढ़ की राजनीति में बिजली बिल को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस ने आरोप (Chhattisgarh Electricity Bill Dues) लगाया है कि राज्य में प्रभावशाली लोगों, जनप्रतिनिधियों और सरकारी संस्थानों पर करीब 6500 करोड़ रुपये के बिजली बिल बकाया हैं, लेकिन कार्रवाई आम उपभोक्ताओं पर ही हो रही है। पार्टी ने इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से सीधे जवाब मांगा है।
कांग्रेस का कहना है कि जब मंत्री, सांसद, वरिष्ठ आईएएस अधिकारी और सरकारी दफ्तर ही बिजली बिल समय पर नहीं चुका रहे, तो आम जनता से सख्ती और दरों में बढ़ोतरी का दबाव क्यों बनाया जा रहा है।
किन-किन पर कितना बकाया?
कांग्रेस द्वारा जारी विवरण के अनुसार रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल पर 12 लाख 76 हजार रुपये से अधिक का बिजली बिल बकाया बताया (Chhattisgarh Electricity Bill Dues) गया है। वहीं मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, टंकराम वर्मा और उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के नाम भी लाखों रुपये के बकाया का दावा किया गया है।
वरिष्ठ अधिकारियों में आईएएस राजेंद्र कटारा, अविनाश मिश्र और हितेंद्र विश्वकर्मा के नाम शामिल हैं। इसके अलावा आईएएस मेस और विधानसभा सचिवालय पर भी लाखों रुपये के बिजली बिल लंबित होने का आरोप लगाया गया है।
कांग्रेस के सवाल
क्या सत्ता में बैठे लोगों के लिए नियम अलग हैं?
यदि किसी को छूट दी गई है तो उसका आधार क्या है?
आम उपभोक्ताओं पर सख्ती, लेकिन रसूखदारों पर चुप्पी क्यों?
सरकार से सीधी मांग
कांग्रेस ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में मांग की है कि सभी मंत्रियों, सांसदों, अधिकारियों और सरकारी संस्थानों से लंबित बिजली बिल की तत्काल वसूली (Chhattisgarh Electricity Bill Dues) की जाए और इसकी पूरी सूची सार्वजनिक की जाए।
पार्टी का कहना है कि बिजली बोर्ड पर बढ़ते कर्ज का हवाला देकर आम लोगों के बिल बढ़ाने की बात की जाती है, जबकि असली बकाया सरकार और प्रशासनिक तंत्र के भीतर ही जमा है। कांग्रेस ने साफ किया है कि जब तक जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक आम जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालना अनुचित है।


