सीजी भास्कर, 9 जनवरी। आधुनिक चिकित्सा पद्धति के माध्यम से सांवरा जनजाति को स्वास्थ्य सेवाओं की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक अनुकरणीय पहल सामने आई है। मुंगेली जिले के कलेक्टर के निर्देशानुसार ग्राम दाऊकापा में विशेष निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया। इस सांवरा जनजाति स्वास्थ्य शिविर (Sanwara Janjati Swasthya Shivir) के माध्यम से दूरस्थ अंचल में निवासरत जनजातीय समुदाय को संगठित स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराई गई, जिससे समुदाय में भरोसा और जागरूकता दोनों का विस्तार हुआ।
आयोजित शिविर में 142 सांवरा समुदाय के महिला-पुरुष, बुजुर्ग एवं बच्चों ने स्वास्थ्य परीक्षण कराकर उपचार कराया। जांच के दौरान सामान्य स्वास्थ्य परीक्षण में उच्च रक्तचाप के 12, मोतियाबिंद के 11, दाद-खाज-खुजली के 27, सर्दी-खांसी के 17, बॉडी पेन के 14, मधुमेह के 06, कमजोरी के 13, कान संक्रमण के 06 तथा कुपोषण के 02 मरीज चिन्हित किए गए। सामान्य रोगियों का मौके पर ही उपचार किया गया, जबकि गंभीर रोगियों को बेहतर इलाज हेतु जिला अस्पताल भेजने की सलाह दी गई। यह सांवरा जनजाति स्वास्थ्य शिविर (Sanwara Janjati Swasthya Shivir) जनजातीय समाज के लिए राहत का केंद्र बना रहा।
चिकित्सकों ने बताया कि यह शिविर केवल इलाज तक सीमित नहीं रहा, बल्कि समुदाय को स्वास्थ्य, टीकाकरण एवं सरकारी जनकल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने का भी प्रभावी माध्यम बना। स्थानीय भाषा और संवेदनशील संवाद शैली में परामर्श दिया गया, जिससे लोग बिना किसी संकोच के अपनी समस्याएं साझा कर सके। मातृ-शिशु स्वास्थ्य, समय पर टीकाकरण, गैर-संचारी रोगों की जांच, मौसमी बीमारियों से बचाव एवं सर्पदंश की स्थिति में सावधानियों की जानकारी दी गई। इस सांवरा जनजाति स्वास्थ्य शिविर (Sanwara Janjati Swasthya Shivir) के दौरान निःशुल्क दवाइयों का वितरण भी किया गया।
कार्यक्रम के दौरान समुदाय को टोना-टोटका, झाड़-फूंक और ओझा-गुणिया जैसे पारंपरिक तरीकों से इलाज न कराने की समझाइश दी गई। विशेष रूप से सांप काटने, तेज बुखार, संक्रमण, हृदयघात, ब्रेन स्ट्रोक और गंभीर चोट की स्थिति में तुरंत अस्पताल पहुंचने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। चिकित्सकों ने स्पष्ट किया कि इलाज में देरी कई बार जानलेवा साबित हो सकती है। इस (सांवरा जनजाति स्वास्थ्य शिविर) ने आधुनिक चिकित्सा के प्रति विश्वास को मजबूती प्रदान की है।
उल्लेखनीय है कि नट एवं सांवरा समुदाय परंपरागत घरेलू उपचारों पर अधिक निर्भर रहता है, जिसके कारण गंभीर बीमारियों में समय पर इलाज नहीं मिल पाता। ऐसे में इस प्रकार के शिविर जनजातीय समाज के जीवन की रक्षा के साथ-साथ उन्हें स्वास्थ्य सेवाओं की मुख्यधारा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। शिविर में चिकित्सकगण, स्वास्थ्य कर्मचारी, जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे, जिससे आयोजन की व्यापक सफलता स्पष्ट रूप से दिखाई दी।


