सीजी भास्कर, 14 जनवरी। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कस्टम मिलिंग घोटाले में हाईकोर्ट से दो प्रमुख आरोपियों (Chhattisgarh Scam Case) को बड़ी राहत मिली है। न्यायालय ने इस मामले में आरोपी अनवर ढेबर और सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा की जमानत याचिका स्वीकार कर ली है। इसके साथ ही शराब घोटाले से जुड़े एक अन्य प्रकरण में भी दो आरोपियों को जमानत दी गई है।
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद दोनों आरोपियों के जेल से बाहर आने का रास्ता साफ हो गया है, हालांकि मामले की जांच और सुनवाई आगे भी जारी रहेगी।
ईओडब्ल्यू केस में मिली जमानत
बचाव पक्ष की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता हर्षवर्धन परघनिया ने बताया कि आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) द्वारा दर्ज कस्टम मिलिंग घोटाले के प्रकरण में हाईकोर्ट ने दोनों आरोपियों की जमानत मंजूर (Chhattisgarh Scam Case) की है। कोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह फैसला सुनाया। इसी क्रम में शराब घोटाले से जुड़े अलग मामले में आरोपी मुकेश मनचंदा और अतुल सिंह को भी न्यायालय से राहत मिली है।
140 करोड़ से अधिक का बताया जा रहा है घोटाला
जांच एजेंसी के अनुसार, कस्टम मिलिंग घोटाले की राशि 140 करोड़ रुपये से अधिक आंकी (Chhattisgarh Scam Case) जा रही है। आरोप है कि इस पूरे मामले में अफसरों, बिचौलियों और राइस मिलर्स एसोसिएशन से जुड़े पदाधिकारियों की मिलीभगत से बड़े पैमाने पर अवैध वसूली की गई।
नागरिक आपूर्ति निगम और भारतीय खाद्य निगम (FCI) के लिए चावल जमा करने की प्रक्रिया के दौरान नियमों को नजरअंदाज कर आर्थिक लाभ उठाने के आरोप लगाए गए हैं।
प्रति क्विंटल 20 रुपये की अवैध वसूली का आरोप
ईओडब्ल्यू की जांच में यह भी सामने आया कि कस्टम मिलिंग के नाम पर राइस मिलरों से प्रति क्विंटल 20 रुपये की अवैध वसूली (Chhattisgarh Scam Case) की जाती थी। आरोप है कि मिलरों के बिल जानबूझकर लंबित रखे जाते थे, ताकि भुगतान के लिए दबाव बनाया जा सके। जांच एजेंसी का दावा है कि इस तरीके से करीब 20 करोड़ रुपये की अवैध राशि इकट्ठा की गई।
पहले भी पेश हो चुका है चालान
ईओडब्ल्यू ने इस मामले में फरवरी 2025 में पहला चालान पेश किया था। इसके बाद जांच के दायरे में आए अनवर ढेबर और अनिल टुटेजा के खिलाफ भी प्रकरण दर्ज कर उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा गया था।
अब हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद दोनों को राहत (Chhattisgarh Scam Case) मिली है, लेकिन कानूनी जानकारों का कहना है कि इससे ट्रायल या जांच की प्रक्रिया पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
आगे भी बनी रहेगी एजेंसियों की नजर
कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक, जमानत मिलने का अर्थ यह नहीं है कि आरोप समाप्त हो गए हैं। आने वाले दिनों में इस घोटाले से जुड़े अन्य आरोपियों और लेन-देन की कड़ियों पर अदालत और जांच एजेंसियों की नजर बनी रहेगी।


