सीजी भास्कर, 15 जनवरी | छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने वैवाहिक विवादों में Dowry Harassment Misuse को लेकर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने साफ कहा है कि पति-पत्नी के आपसी झगड़े में बिना ठोस सबूत के ससुराल के पूरे परिवार को आरोपी बनाना न सिर्फ गलत है, बल्कि यह न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग भी है।
बेंच की स्पष्ट राय: आरोप नहीं, सबूत जरूरी
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की डिवीजन बेंच ने कहा कि केवल सामान्य आरोपों के आधार पर पति के रिश्तेदारों को आपराधिक मुकदमे में घसीटना कानून की भावना के खिलाफ है। Dowry Harassment Misuse को एक दबाव बनाने का जरिया नहीं बनने दिया जा सकता।
शादी के बाद बढ़ा विवाद, फिर दर्ज हुई FIR
मामला वर्ष 2022 में हुई एक मुस्लिम विवाह से जुड़ा है। शादी के कुछ समय बाद पति-पत्नी के बीच मतभेद बढ़ने लगे। पत्नी ने आरोप लगाया कि उसे दहेज के लिए प्रताड़ित किया गया, जबकि पति का कहना था कि घरेलू विवाद के चलते वह पत्नी को मायके छोड़ आया था।
तलाक नोटिस के बाद सामने आया आपराधिक केस
कोर्ट के रिकॉर्ड के अनुसार, पति की ओर से कानूनी रूप से तलाक नोटिस दिए जाने के बाद महिला ने दहेज प्रताड़ना की शिकायत दर्ज कराई। इसी बिंदु पर हाईकोर्ट ने Dowry Harassment Misuse की आशंका को गंभीरता से परखा।
शिकायत में नहीं था कोई ठोस विवरण
हाईकोर्ट ने पाया कि FIR में ससुराल पक्ष के खिलाफ न तो किसी खास तारीख का जिक्र था, न किसी विशिष्ट घटना का। आरोप व्यापक और सामान्य प्रकृति के थे, जो किसी आपराधिक कार्रवाई को सही ठहराने के लिए पर्याप्त नहीं माने जा सकते।
गवाह के बयान ने कमजोर की शिकायत
मामले में एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी सामने आया कि शिकायतकर्ता के ही परिजन ने बयान में स्वीकार किया था कि शादी के समय दिए गए जेवर और सामान वापस कर दिए गए थे। इस तथ्य ने Dowry Harassment Misuse के आरोपों को और कमजोर कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले का हवाला
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के एक चर्चित फैसले का उल्लेख करते हुए कहा कि वैवाहिक विवादों में दूर-दराज के रिश्तेदारों को बिना प्रमाण फंसाना उत्पीड़न का एक तरीका बनता जा रहा है, जिसे रोका जाना जरूरी है।
FIR और आपराधिक कार्यवाही रद्द
सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने महिला थाने में दर्ज FIR और मजिस्ट्रेट कोर्ट में चल रहे आपराधिक मामले को रद्द कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कानून का इस्तेमाल बदले या दबाव के हथियार के रूप में नहीं किया जा सकता।
फैसले का व्यापक संदेश
यह निर्णय उन मामलों में एक अहम संदेश देता है, जहां Dowry Harassment Misuse के जरिए पूरे परिवार को कानूनी पचड़े में फंसाने की कोशिश की जाती है। कोर्ट ने संतुलन बनाए रखने और निष्पक्ष न्याय की जरूरत पर जोर दिया है।





