सीजी भास्कर, 16 जनवरी | Chhattisgarh Cold Wave Alert: छत्तीसगढ़ में ठंड का असर अभी बरकरार है। खासकर उत्तर छत्तीसगढ़ के इलाकों में शीतलहर ने लोगों की दिनचर्या प्रभावित कर दी है। मौसम विभाग के अनुसार अगले दो दिनों तक ठंड से राहत की उम्मीद कम है, हालांकि तीन दिन बाद न्यूनतम तापमान में हल्की बढ़ोतरी के संकेत मिल रहे हैं।
इन 6 जिलों में शीतलहर का अलर्ट
कोरिया, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, सूरजपुर, बलरामपुर, सरगुजा और जशपुर जिले के एक-दो क्षेत्रों में शीतलहर की स्थिति बनी हुई है। बीते 24 घंटों में सरगुजा संभाग के कई हिस्सों में ठंडी हवाओं का असर साफ तौर पर महसूस किया गया।
अंबिकापुर सबसे ठंडा, दुर्ग सबसे गर्म
प्रदेश में बीते दिन सबसे कम न्यूनतम तापमान अंबिकापुर में 4.4 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जबकि अधिकतम तापमान दुर्ग में 30 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा। तापमान के इस बड़े अंतर ने ठंड की तीव्रता को और बढ़ा दिया है। (Chhattisgarh Cold Wave Alert)
मौसम प्रणाली ने बढ़ाई ठंड
मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक हाल के दिनों में सक्रिय रहे पश्चिमी विक्षोभ और तेज जेट स्ट्रीम के कारण ठंडी हवाएं उत्तर भारत से मध्य भारत की ओर तेजी से बढ़ीं। इसका असर यह हुआ कि रात का तापमान तेजी से नीचे गिरा और सुबह-शाम ठंड ज्यादा महसूस होने लगी।
फ्रिज और पंखे जैसा असर
मौसम विशेषज्ञ इस स्थिति को एक आसान उदाहरण से समझाते हैं— जैसे फ्रिज का दरवाजा खुला रह जाए और पंखा चलने लगे, तो ठंडी हवा दूर-दूर तक फैल जाती है। यहां पश्चिमी विक्षोभ ठंड का स्रोत बना और जेट स्ट्रीम ने उस ठंड को छत्तीसगढ़ तक पहुंचा दिया।
तीन दिन बाद मिल सकती है राहत
अनुमान है कि अगले तीन दिनों तक न्यूनतम तापमान में खास बदलाव नहीं होगा। इसके बाद धीरे-धीरे तापमान में 1 से 3 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे ठंड से कुछ हद तक राहत मिलने की संभावना है। (Chhattisgarh Cold Wave Alert)
बच्चों की सेहत पर दिख रहा असर
लगातार पड़ रही कड़ाके की ठंड का असर बच्चों की सेहत पर भी पड़ रहा है। पिछले एक महीने में अस्पतालों में हाइपोथर्मिया के कई मामले सामने आए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों और नवजात शिशुओं में ठंड का असर जल्दी होता है, इसलिए उन्हें विशेष देखभाल की जरूरत है।
नवजातों के लिए ज्यादा सतर्कता जरूरी
डॉक्टरों के अनुसार नवजात शिशुओं, खासकर सिजेरियन डिलीवरी से जन्मे बच्चों में हाइपोथर्मिया का खतरा ज्यादा रहता है। ऐसे में गर्म कपड़े, उचित तापमान और समय-समय पर जांच बेहद जरूरी है।


