सीजी भास्कर 19 जनवरी बालोद जिले के सरदार पटेल मैदान में रविवार को कुर्मी क्षत्रिय समाज का वार्षिक सम्मेलन आयोजित किया गया था। समाज के इस आयोजन में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल बतौर अतिथि शामिल हुए। कार्यक्रम सामान्य ढंग से आगे बढ़ रहा था, लेकिन संबोधन के दौरान मंच का माहौल अचानक गर्म हो गया और (Bhupesh Baghel Kurmi Samaj Controversy) चर्चा का विषय बन गया।
मंच से रोके जाने पर तीखी प्रतिक्रिया
भूपेश बघेल जब किसानों से जुड़े मुद्दों पर बोल रहे थे, तभी मंच पर मौजूद समाज के कुछ पदाधिकारियों ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि यह सामाजिक मंच है, यहां राजनीतिक बातों से बचा जाए। इसी बात पर भूपेश बघेल असहज हो गए और भावुक अंदाज़ में बोले—“अगर सम्मान नहीं दे सकते तो बुलाया ही मत करो।” यह टिप्पणी सुनते ही पंडाल में सन्नाटा छा गया।
‘किसान की बात राजनीति कैसे?’
पूर्व मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि वे किसानों के हक की बात कर रहे थे, न कि किसी दल की राजनीति। उन्होंने सवाल उठाया कि जब दूसरे राजनीतिक विचारधारा के लोग मंच और पंडाल में बैठे हैं, तब आपत्ति केवल उन्हीं की बातों पर क्यों जताई जा रही है। यही बिंदु आगे चलकर (Political Tension at Social Event) की वजह बना।
सम्मान को लेकर समाज को दी नसीहत
संबोधन समाप्त करने के बाद भूपेश बघेल ने दो टूक कहा कि अगर किसी को किसी अतिथि की बात से असुविधा होती है, तो खेद की अपेक्षा न रखे। उन्होंने समाज से आग्रह किया कि किसी भी कार्यक्रम में अतिथि को बुलाने से पहले यह तय किया जाए कि उसे सम्मान भी दिया जाएगा या नहीं। यह बयान (Public मंच पर सम्मान विवाद) के रूप में चर्चा में आ गया।
भाजपा सरकार पर सीधा हमला
कार्यक्रम के दौरान और बाद में भूपेश बघेल ने राज्य की भाजपा सरकार को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने धान खरीदी व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि कहीं धान चूहे खा जा रहे हैं, तो कहीं ट्रक गायब हो रहे हैं और जंगलों में मिल रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि मौजूदा हालात में तय समय पर खरीदी पूरी होना मुश्किल है, जिससे किसानों को नुकसान होगा। यह मुद्दा (Farmers Procurement Issue) से जोड़कर उठाया गया।
राजनीतिक बयान से आगे बढ़ी चर्चा
बालोद की इस घटना के बाद सम्मेलन की चर्चा केवल सामाजिक दायरे तक सीमित नहीं रही। स्थानीय लोगों और राजनीतिक गलियारों में यह सवाल उठने लगा कि सामाजिक मंचों पर जनप्रतिनिधियों की भूमिका और अभिव्यक्ति की सीमा आखिर तय कौन करता है। यही वजह है कि यह पूरा घटनाक्रम (Bhupesh Baghel Statement) के रूप में सुर्खियों में बना हुआ है।




