सीजी भास्कर, 19 जनवरी। छत्तीसगढ़ के माओवादी हिंसा प्रभावित बीजापुर जिले से सुरक्षा बलों की बड़ी कार्रवाई सामने आई है। जिले के नेशनल पार्क क्षेत्र में हुए (Bijapur Encounter) के बाद तेलंगाना भाजपा ने दावा किया है कि इस मुठभेड़ में माओवादियों का शीर्ष कमांडर पापाराव उर्फ मोंगू मारा गया है। भाजपा की तेलंगाना इकाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर यह दावा किया है। हालांकि, छत्तीसगढ़ पुलिस की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
संयुक्त सुरक्षा बलों द्वारा चलाए गए माओवादी विरोधी अभियान के दौरान अब तक (Bijapur Encounter) स्थल से छह माओवादियों के शव बरामद किए गए हैं। मौके से दो एके-47 राइफलें, भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री और अन्य नक्सली सामग्री भी जब्त की गई है। मारे गए छह माओवादियों में से चार की पहचान कर ली गई है, जिन पर बीस-बीस लाख रुपये का इनाम घोषित था, जबकि दो अन्य की पहचान की प्रक्रिया जारी है।
50 लाख का इनामी था पापाराव
पापाराव मूल रूप से तेलंगाना के जगतियाल जिले का निवासी था और पिछले करीब दो दशकों से बस्तर के घने जंगलों में सक्रिय था। वह दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी का सदस्य और माओवादी संगठन के शीर्ष कमांड में शामिल था। उस पर पचास लाख रुपये से अधिक का इनाम घोषित था। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार पापाराव कई बड़ी माओवादी वारदातों का मास्टरमाइंड रहा है।
पापाराव का नाम वर्ष 2010 के दंतेवाड़ा हमले से भी जुड़ा रहा है, जिसमें सीआरपीएफ के 76 जवान शहीद हुए थे। बीते वर्ष नवंबर में एक अन्य मुठभेड़ के दौरान उसकी पत्नी उर्मिला के मारे जाने की भी पुष्टि हुई थी। यदि इस (Bijapur Encounter) में पापाराव के मारे जाने की आधिकारिक पुष्टि होती है, तो यह माओवादी संगठन के लिए बड़ा झटका माना जाएगा।
कैसे हुई मुठभेड़
सुरक्षा बलों को खुफिया इनपुट मिला था कि बीजापुर के नेशनल पार्क क्षेत्र में बड़ी संख्या में सशस्त्र माओवादी मौजूद हैं। इसके बाद जिला रिजर्व गार्ड, कोबरा और अन्य संयुक्त बलों ने इलाके में घेराबंदी कर सर्च ऑपरेशन शुरू किया। इसी दौरान माओवादियों ने फायरिंग शुरू कर दी, जिसके जवाब में सुरक्षाबलों ने मोर्चा संभाला। कई घंटे तक चली भीषण मुठभेड़ के बाद (Bijapur Encounter) में छह माओवादी मारे गए।
माओवाद के खिलाफ निर्णायक दौर
पिछले एक वर्ष में छत्तीसगढ़ में माओवाद के खिलाफ अभियान निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है। केंद्र सरकार के मार्च 2026 तक नक्सल मुक्त भारत के लक्ष्य के तहत बस्तर संभाग में लगातार सफलताएं मिल रही हैं।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार बीते एक साल में 250 से 300 से अधिक माओवादी मुठभेड़ों में मारे गए हैं, जो पिछले एक दशक का सबसे बड़ा आंकड़ा माना जा रहा है। इसी अवधि में पुनर्वास नीति और लोन वर्राटू अभियान के तहत 1500 से अधिक माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया है, जबकि 800 से अधिक सक्रिय माओवादी और उनके सहयोगी गिरफ्तार किए गए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पापाराव की मौत की पुष्टि होती है, तो यह (Bijapur Encounter) माओवादी संगठन के लिए रणनीतिक, संगठनात्मक और मनोवैज्ञानिक रूप से अब तक का सबसे बड़ा झटका साबित होगा।




