सीजी भास्कर, 19 जनवरी। छत्तीसगढ़ शासन के आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग (High Court Stay On Demotion Order) द्वारा सहायक अनुसंधान अधिकारी के पद पर पदस्थ मीनाक्षी भगत को डिमोट कर पुनः सहायक सांख्यिकी अधिकारी बनाए जाने के आदेश पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण हस्तक्षेप करते हुए रोक लगा दी है। न्यायालय ने इस पूरे प्रकरण को प्रथम दृष्टया गंभीर मानते हुए राज्य शासन और संबंधित विभाग को नोटिस जारी कर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। यह आदेश सेवा मामलों में प्रशासनिक पारदर्शिता और कर्मचारी अधिकारों की दृष्टि से अहम माना जा रहा है।
याचिकाकर्ता मीनाक्षी भगत की प्रारंभिक नियुक्ति वर्ष 2008 में सहायक सांख्यिकी अधिकारी के पद पर हुई थी। विभाग द्वारा समय-समय पर जारी वरिष्ठता सूची में उनका नाम वरीयता क्रम में प्रथम स्थान पर दर्ज था। इसी वरिष्ठता के आधार पर विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) द्वारा उन्हें उपयुक्त मानते हुए सहायक अनुसंधान अधिकारी के पद पर पदोन्नति की अनुशंसा की गई थी। डीपीसी की इस अनुशंसा के बाद दिसंबर 2022 में आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग द्वारा विधिवत आदेश जारी कर उन्हें सहायक अनुसंधान अधिकारी के पद पर पदोन्नत किया गया था, जिसके बाद से वे लगातार इस पद पर नियमित रूप से कार्य कर रही थीं। इस पूरी प्रक्रिया में (High Court Stay On Demotion Order) से जुड़ा कोई विवाद सामने नहीं आया था।
बाद में विभाग के कुछ अन्य अनुसंधान सहायकों ने मीनाक्षी भगत की पदोन्नति और डीपीसी की अनुशंसा को चुनौती देते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में याचिका दायर की। इसके साथ ही विभाग के समक्ष सामूहिक अभ्यावेदन भी प्रस्तुत किया गया। विभागीय स्तर पर अभ्यावेदन की जांच के दौरान यह तर्क सामने लाया गया कि वर्ष 2016 और 2020 में सहायक अनुसंधान अधिकारी, सहायक नियोजन अधिकारी एवं सहायक सांख्यिकी अधिकारी के पदों के लिए संयुक्त सूची तैयार की गई थी। इसी आधार पर विभागीय पदोन्नति समिति की 28 दिसंबर 2022 की बैठक का पुनरीक्षण करते हुए 11 दिसंबर 2025 को पुनरीक्षित बैठक आयोजित की गई, जिससे (High Court Stay On Demotion Order) से जुड़ा विवाद उत्पन्न हुआ।
पुनरीक्षित डीपीसी बैठक में यह कहते हुए मीनाक्षी भगत के नाम पर पुनः विचार किया गया कि संबंधित संवर्ग में पद रिक्त नहीं है, इसलिए उनकी पदोन्नति की अनुशंसा अब संभव नहीं है। इस निष्कर्ष के आधार पर राज्य शासन द्वारा 31 दिसंबर 2025 को आदेश जारी कर मीनाक्षी भगत को सहायक अनुसंधान अधिकारी के पद से डिमोट करते हुए पुनः सहायक सांख्यिकी अधिकारी के पद पर पदस्थ कर दिया गया। इस आदेश ने सेवा नियमों और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
डिमोशन आदेश से आहत मीनाक्षी भगत ने अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी और नरेंद्र मेहेर के माध्यम से छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में याचिका दायर की। याचिका पर सुनवाई न्यायमूर्ति पी.पी. साहू के समक्ष हुई। याचिकाकर्ता की ओर से यह दलील दी गई कि दिसंबर 2022 से वह नियमित रूप से सहायक अनुसंधान अधिकारी के पद पर कार्यरत थीं और बिना कोई पूर्व सूचना, कारण बताओ नोटिस या सुनवाई का अवसर दिए डिमोशन किया जाना स्पष्ट रूप से प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है। इस तर्क के साथ (High Court Stay On Demotion Order) का हवाला देते हुए न्यायालय का हस्तक्षेप मांगा गया।
प्रथम दृष्टया प्रस्तुत तथ्यों और दलीलों से सहमत होते हुए हाईकोर्ट ने आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग द्वारा 31 दिसंबर 2025 को जारी डिमोशन आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी है। साथ ही न्यायालय ने राज्य शासन और अन्य उत्तरवादीगण को नोटिस जारी कर मामले में विस्तृत जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। हाईकोर्ट का यह आदेश (High Court Stay On Demotion Order) के तहत सेवा मामलों में निष्पक्षता, पारदर्शिता और कर्मचारी अधिकारों की रक्षा के दृष्टिकोण से एक महत्वपूर्ण मिसाल माना जा रहा है।




