सीजी भास्कर, 19 जनवरी। निजी अस्पतालों में महंगे इलाज और सीमित पहुंच के बीच, रायपुर के सरकारी अस्पताल ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज कर यह साबित कर दिया है कि सरकारी स्वास्थ्य संस्थान भी अत्याधुनिक तकनीक, विशेषज्ञता और संवेदनशीलता के साथ जीवन रक्षक उपचार देने में पूरी तरह सक्षम हैं। राजधानी रायपुर स्थित पंडित जे.एल. नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय एवं डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मृति चिकित्सालय (मेकाहारा) के एडवांस्ड कार्डियक केयर इंस्टिट्यूट ने (Open Heart Surgery Raipur Government Hospital) के क्षेत्र में एक नई मिसाल कायम की है।
नववर्ष 2026 की शुरुआत इस संस्थान के लिए एक बड़ी उपलब्धि लेकर आई, जब कार्डियोलॉजी और कार्डियक सर्जरी की संयुक्त टीम ने अत्यंत जटिल ट्रांसकैथेटर ऑर्टिक वाल्व प्रत्यारोपण (TAVI) प्रक्रिया को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। यह प्रक्रिया एक बुजुर्ग महिला मरीज पर की गई, जो लंबे समय से सांस फूलने और हार्ट फेलियर जैसी गंभीर समस्या से जूझ रही थीं। जांच में सामने आया कि उनका ऑर्टिक वाल्व पूरी तरह कैल्शियम से कठोर हो चुका था और हृदय की पंपिंग क्षमता मात्र 20 प्रतिशत रह गई थी। इस स्थिति में पारंपरिक ओपन हार्ट सर्जरी अत्यंत जोखिमपूर्ण और लगभग असंभव मानी जा रही थी।
पं. जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय के अधिष्ठाता प्रो. डॉ. विवेक चौधरी ने बताया कि वर्ष 2025 में कार्डियोलॉजी विभाग द्वारा 2600 से अधिक जटिल हृदय प्रक्रियाएं सफलतापूर्वक की गईं। वर्ष 2009 में मात्र 41 मामलों से शुरू हुआ यह विभाग आज प्रतिवर्ष 2000 से अधिक उन्नत कार्डियक प्रक्रियाओं को अंजाम दे रहा है, जो (Open Heart Surgery Raipur Government Hospital) पर आमजन के बढ़ते भरोसे को दर्शाता है।
कार्डियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. स्मित श्रीवास्तव ने बताया कि मरीज की जटिल स्थिति को देखते हुए कार्डियोलॉजी और कार्डियक सर्जरी विभाग की संयुक्त ‘हार्ट टीम’ गठित की गई। डॉ. कृष्णकांत साहू के नेतृत्व में सर्जरी टीम को स्टैंडबाय रखा गया और बिना चीर-फाड़ के पैर की नस के माध्यम से वाल्व प्रत्यारोपण का निर्णय लिया गया। यह निर्णय तकनीकी दृष्टि से अत्यंत चुनौतीपूर्ण था, क्योंकि मरीज की पैर की नसें पतली और कैल्शियम युक्त थीं तथा हृदय की कोरोनरी धमनियां वाल्व के अत्यंत समीप स्थित थीं।
जांच और तैयारी की प्रक्रिया एक माह पूर्व विशेष सीटी स्कैन एनालिसिस के साथ प्रारंभ की गई, जिसे मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना के तहत वित्तीय स्वीकृति भी प्राप्त हुई। प्रक्रिया के दौरान कोरोनरी धमनियों के बंद होने की आशंका को देखते हुए विशेषज्ञों ने दोनों धमनियों में स्टेंट डालकर वाल्व और धमनियों के बीच “चिमनी” संरचना विकसित की। यह तकनीक (Open Heart Surgery Raipur Government Hospital) की विशेषज्ञता और नवाचार क्षमता को दर्शाती है।
प्रक्रिया के अंतिम चरण में बाएं पैर की नस में अचानक ब्लॉकेज उत्पन्न हो गया, जिसे तत्काल दाहिने पैर के माध्यम से बलून एंजियोप्लास्टी कर नियंत्रित किया गया। लगभग चार घंटे तक चली इस जटिल प्रक्रिया के बाद ऑपरेशन टेबल पर ही मरीज के ऑर्टिक वाल्व का प्रेशर 80 से घटकर शून्य हो गया और हृदय की पंपिंग क्षमता 20 प्रतिशत से बढ़कर 60 प्रतिशत तक पहुंच गई। दोनों कोरोनरी धमनियों में रक्त प्रवाह सामान्य रहा और हृदय की धड़कन पूरी तरह स्थिर पाई गई।
अस्पताल अधीक्षक प्रो. डॉ. संतोष सोनकर ने इस सफलता के लिए कार्डियोलॉजी टीम को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि संस्थान में उपलब्ध संसाधनों, विशेषज्ञ मानवबल और बेहतर समन्वय का प्रतिफल है। यह ऑपरेशन डॉ. स्मित श्रीवास्तव के नेतृत्व में डॉ. शिवकुमार शर्मा, डॉ. कुणाल ओस्तवाल, डॉ. प्रतीक गुप्ता, डॉ. सौम्या, डॉ. वैभव एवं डॉ. प्रिंस द्वारा संपन्न किया गया। कैथलैब टेक्नीशियन, नर्सिंग स्टाफ और कार्डियक एनेस्थेसियोलॉजी विशेषज्ञों का योगदान भी उल्लेखनीय रहा।
ऑपरेशन के बाद मरीज को हार्ट कमांड सेंटर में अति गहन निगरानी में रखा गया, जहां रिमोट व्यूइंग तकनीक से 24 घंटे टेली-मॉनिटरिंग की गई। वर्तमान में मरीज पूर्णतः स्वस्थ होकर डिस्चार्ज ले चुकी हैं। उनके परिजनों ने (Open Heart Surgery Raipur Government Hospital) की टीम, अस्पताल प्रबंधन और छत्तीसगढ़ शासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर अपने विश्वास को और अधिक मजबूत बताया।




