सीजी भास्कर 20 जनवरी छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में 9 साल की बच्ची के साथ हुई दुष्कर्म की घटना ने पूरे प्रशासनिक तंत्र को झकझोर कर रख दिया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य बाल आयोग ने तत्काल संज्ञान लेते हुए न केवल प्रकरण दर्ज किया, बल्कि हर स्तर पर निगरानी शुरू कर दी है। यह मामला अब (Child Sexual Assault Case Raipur) के रूप में संवेदनशील निगरानी सूची में रखा गया है।
14 जनवरी को दर्ज हुआ प्रकरण, चार बिंदुओं पर जांच
घटना की सूचना मिलते ही 14 जनवरी को बाल आयोग द्वारा औपचारिक रूप से प्रकरण दर्ज किया गया। आयोग ने चार अहम बिंदुओं—बच्ची का शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक परामर्श, सुरक्षा व्यवस्था और आर्थिक सहायता—पर तत्काल जांच के निर्देश जारी किए। आयोग का स्पष्ट रुख है कि पीड़िता को किसी भी स्तर पर असहाय न छोड़ा जाए।
पीड़िता के घर पहुंची आयोग अध्यक्ष, परिजनों से की मुलाकात
मामले की अद्यतन स्थिति जानने के लिए 17 जनवरी को राज्य बाल आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा आईसीपीएस टीम, बाल कल्याण समिति (CWC) और सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ पीड़िता के निवास पहुंचीं। उन्होंने बच्ची और उसके परिजनों से बेहद संवेदनशीलता के साथ बातचीत की और भरोसा दिलाया कि न्याय की प्रक्रिया में कोई भी ढिलाई नहीं बरती जाएगी।
रिपोर्ट में देरी पर आयोग की सख्त नाराजगी
बच्ची की स्थिति को देखते हुए आयोग अध्यक्ष ने रिपोर्ट प्रस्तुत न होने पर नाराजगी जाहिर की। जांच के दौरान सामने आया कि संबंधित प्रकरण अभी तक थाना स्तर से बाल कल्याण समिति तक औपचारिक रूप से नहीं पहुंच पाया था। इस देरी को गंभीर मानते हुए तत्काल समन्वय के निर्देश दिए गए।
मौके पर मनोवैज्ञानिक परामर्श, त्वरित निर्देश जारी
निरीक्षण के दौरान टीम के साथ मौजूद बाल मनोवैज्ञानिक द्वारा बच्ची को मौके पर ही परामर्श दिया गया। आयोग अध्यक्ष ने स्पष्ट कहा कि ऐसे मामलों में मानसिक उपचार उतना ही जरूरी है, जितना शारीरिक उपचार। संबंधित अधिकारियों को संवेदनशीलता और तत्परता के साथ कार्य करने के निर्देश दिए गए।
आर्थिक सहायता और सुरक्षा के आदेश
जिला बाल संरक्षण अधिकारी और संबंधित थाना प्रभारी को निर्देशित किया गया कि पीड़ित परिवार को नियमानुसार आर्थिक सहायता तुरंत उपलब्ध कराई जाए। साथ ही परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने के आदेश भी दिए गए, ताकि किसी भी प्रकार का दबाव या भय उत्पन्न न हो।
अस्पताल में भर्ती बच्ची, विशेष चिकित्सा देखरेख
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) को निर्देश दिए गए कि बच्ची का उपचार महिला रोग विशेषज्ञ की देखरेख में कराया जाए। वर्तमान में बच्ची अस्पताल में भर्ती है और चिकित्सकीय व मानसिक देखरेख लगातार की जा रही है। यह पूरा उपचार (Child Protection Monitoring India) के मानकों के अनुसार किया जा रहा है।
22 जनवरी को पेश होगी जांच रिपोर्ट
मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से विशेष ध्यान देने का आग्रह किया गया है। बाल कल्याण समिति द्वारा इस पूरे प्रकरण की विस्तृत रिपोर्ट 22 जनवरी को बाल आयोग कार्यालय में प्रस्तुत की जाएगी। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई तय की जाएगी।
आयोग की स्पष्ट चेतावनी – बच्ची के हित सर्वोपरि
डॉ. वर्णिका शर्मा ने परिजनों को आश्वस्त किया कि इस निंदनीय अपराध में आयोग हर स्तर पर साथ खड़ा रहेगा। उन्होंने कहा कि बच्ची के सर्वोत्तम हितों की रक्षा करना आयोग की प्राथमिक जिम्मेदारी है और इस मामले की निगरानी स्वयं आयोग स्तर से की जा रही है।




