सीजी भास्कर 20 जनवरी रविवार को झारखंड के महुआडांड़ थाना क्षेत्र की ओरसा घाटी में हुए भीषण हादसे के बाद आज बलरामपुर जनपद पंचायत क्षेत्र में शोक की गहरी छाया दिखी। Jharkhand Bus Accident Balrampur में जान गंवाने वाले 10 लोगों को एक साथ अंतिम विदाई दी गई, गांव की गलियों में सन्नाटा और आंखों में बेबसी साफ नजर आई।
हादसे का दर्दनाक मंजर
दुर्घटना में बस में सवार 100 से अधिक यात्री घायल हुए थे। घायलों का इलाज रांची, गुमला के साथ-साथ अंबिकापुर और बलरामपुर के अस्पतालों में चल रहा है। हादसे की खबर फैलते ही इलाके में मातम पसर गया, परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल रहा।
जिनके घरों में बुझ गए चूल्हे
हादसे में प्रेमा देवी, सीतापती देवी, रेसंती चेरवा, सुखना भुइयां सपता, विजय नगेसिया, सोनामती, लीलावती सोनवानी, रमेश पनिका, नाचू राम और परशुराम सोनवानी की जान चली गई। एक-एक नाम के साथ गांव की एक-एक कहानी, एक-एक परिवार की दुनिया टूटती चली गई।
पिपरसोत गांव पर टूटा दुखों का पहाड़
अधिकांश मृतक ग्राम पिपरसोत के निवासी थे, जबकि कुछ आसपास के गांवों से थे। अंतिम संस्कार के दौरान गांव की हर गली में खामोशी थी, चिताओं की लपटों के साथ आंसुओं की धार भी बहती रही।
ग्रामीणों की टूटी आवाज
अंतिम संस्कार में शामिल ग्रामीण शिवम सिंह ने कहा, “आज हमारा गांव अपूरणीय क्षति से गुजर रहा है। Jharkhand Bus Accident Balrampur ने जो जख्म दिए हैं, उन्हें भरने में बरसों लगेंगे।” उनके शब्दों में दर्द भी था और असहाय स्वीकारोक्ति भी।
एक साथ अंतिम विदाई का दृश्य
जब एक साथ 10 अर्थियां उठीं, तो हर आंख नम थी। महिलाएं विलाप कर रही थीं, बुजुर्ग चुपचाप जमीन ताक रहे थे। यह दृश्य लंबे समय तक गांव की स्मृतियों में दर्ज हो गया।


