सीजी भास्कर, 22 जनवरी। छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार के कार्यकाल में यह पहला मौका (Republic Day Bilaspur CM) होगा, जब मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय 26 जनवरी को बिलासपुर में राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे और परेड की सलामी लेंगे। इससे पहले भाजपा सरकार के दौरान मुख्यमंत्री परंपरागत रूप से जगदलपुर में गणतंत्र दिवस समारोह में शामिल होते रहे हैं, जबकि राजधानी रायपुर में राज्यपाल ध्वजारोहण करते हैं। ऐसे में सीएम का बिलासपुर आना राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है।
इस फैसले को लेकर सत्ता पक्ष के भीतर जहां इसे प्रशासनिक निर्णय बताया जा रहा है, वहीं विपक्ष ने इसे भाजपा की अंदरूनी गुटबाजी से जोड़ दिया है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष दीपक बैज ने इस पर चुटकी लेते हुए कहा कि सरकार से हालात संभल नहीं रहे हैं और भाजपा में सबसे ज्यादा गुटबाजी बिलासपुर में है। उन्होंने आरोप लगाया कि वरिष्ठ नेताओं के बीच संतुलन साधने के लिए मुख्यमंत्री का कार्यक्रम बिलासपुर में तय किया गया है।
दीपक बैज ने यह भी कहा कि भाजपा के वरिष्ठ नेता अमर अग्रवाल को न मंत्री बनाया (Republic Day Bilaspur CM) गया और न ही कार्यक्रमों में सम्मानजनक स्थान मिल पा रहा है। कई आयोजनों में उनके नाम तक को नजरअंदाज किया जा रहा है। कांग्रेस का दावा है कि मुख्यमंत्री का यह दौरा गुटबाजी को “बैलेंस” करने की कोशिश है, लेकिन इससे कोई ठोस सुधार होता नजर नहीं आ रहा।
गौरतलब है कि भाजपा सरकार के दौरान यह पहला अवसर है, जब बतौर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय जगदलपुर के बजाय बिलासपुर में परेड की सलामी लेंगे। हालांकि, छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के बाद पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी वर्ष 2001 से 2003 तक बिलासपुर में ही गणतंत्र दिवस पर ध्वजारोहण कर चुके हैं, ऐसे में साय प्रदेश के दूसरे मुख्यमंत्री होंगे जो बिलासपुर में यह जिम्मेदारी निभाएंगे।
इस बीच बिलासपुर जिले के तीन वरिष्ठ भाजपा विधायकों – अमर अग्रवाल, धरमलाल कौशिक और धर्मजीत सिंह – को इस बार गणतंत्र दिवस पर ध्वजारोहण का अवसर नहीं मिला है। इसे लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं। माना जा रहा है कि जिले में चल रही अंदरूनी खींचतान के चलते इन नेताओं को साइडलाइन किया गया है।
हाल के दिनों में बिलासपुर की राजनीति में हुई घटनाओं ने इन अटकलों को और हवा (Republic Day Bilaspur CM) दी है। युवा महोत्सव के दौरान बैठक व्यवस्था को लेकर सार्वजनिक विवाद हो या फिर सकरी में प्रस्तावित लोकार्पण-शिलान्यास कार्यक्रम का ऐन वक्त पर रद्द होना—इन घटनाओं ने पार्टी के भीतर असंतोष को उजागर किया है। विपक्ष का दावा है कि यही कारण है कि संगठन स्तर पर हस्तक्षेप कर मुख्यमंत्री का बिलासपुर कार्यक्रम तय किया गया है।
अब 26 जनवरी को मुख्यमंत्री के दौरे के बाद यह साफ होगा कि यह सिर्फ एक औपचारिक कार्यक्रम था या फिर इसके पीछे संगठन और सत्ता के भीतर चल रही राजनीति को साधने की कोई बड़ी कोशिश।




