सीजी भास्कर, 23 जनवरी | दुर्ग जिले के धमधा थाना क्षेत्र में सामने आए एक संवेदनशील मामले ने निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। महिला मरीज की इलाज के दौरान मौत के मामले में पुलिस ने कड़ा रुख अपनाते हुए संबंधित डॉक्टर और अस्पताल प्रबंधक को गिरफ्तार कर लिया है। (Medical Negligence Arrest Case) ने इलाके में स्वास्थ्य सेवाओं की जवाबदेही पर नई बहस छेड़ दी है।
घर में गिरने से शुरू हुई इलाज की कहानी
पुलिस के अनुसार, 10 अक्टूबर 2025 की रात पद्माबाई वर्मा अपने घर के आंगन में गिर पड़ी थीं, जिससे उनके पैर में गंभीर चोट आई और वे चलने में असमर्थ हो गईं। अगले दिन 11 अक्टूबर को परिजन उन्हें इलाज के लिए श्रेया अस्पताल एंड डायग्नोस्टिक सेंटर, धमधा लेकर पहुंचे। (Hospital Care Failure) यहीं से इलाज की वह कड़ी शुरू हुई, जो आगे चलकर जानलेवा साबित हुई।
ऑपरेशन के बाद बिगड़ी हालत
अस्पताल में 13 अक्टूबर को महिला के पैर का ऑपरेशन किया गया। परिजनों का कहना है कि ऑपरेशन के बाद मरीज की हालत लगातार बिगड़ती गई। 14 अक्टूबर को सांस तेज चलने और तबीयत गंभीर होने पर अस्पताल प्रबंधन ने उन्हें हायर सेंटर रेफर करने का निर्णय लिया। (Surgical Complication) के दौरान जरूरी सतर्कता नहीं बरती गई, ऐसा आरोप है।
एम्बुलेंस में डॉक्टर नहीं होने का आरोप
परिजनों ने पुलिस को बताया कि रेफर करते समय न तो उनकी सहमति ली गई और न ही एम्बुलेंस में पर्याप्त चिकित्सकीय देखरेख मौजूद थी। आरोप है कि मरीज को बिना डॉक्टर के एम्बुलेंस से शंकराचार्य अस्पताल, जुनवानी भेजा गया, जहां पहुंचते ही डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। (Emergency Referral Lapse) को मौत की अहम वजह माना जा रहा है।
जांच में सामने आई लापरवाही
शिकायत के आधार पर धमधा थाना पुलिस ने मामले की विस्तृत जांच की। जांच में यह तथ्य सामने आया कि अस्पताल प्रबंधन और संबंधित डॉक्टर द्वारा उपेक्षापूर्ण एवं लापरवाहीपूर्ण चिकित्सकीय प्रक्रिया अपनाई गई, जिससे मरीज की जान चली गई। (Police Probe Findings) के बाद कार्रवाई तय मानी जा रही थी।
डॉक्टर और प्रबंधक गिरफ्तार
पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 106(1) और 3(5) के तहत अपराध पंजीबद्ध कर श्रेया अस्पताल धमधा के प्रबंधक मनीष राजपूत (निवासी ग्राम भरनी, जिला दुर्ग) और डॉ. अभिषेक पांडेय (निवासी मॉडल टाउन, स्मृति नगर, भिलाई) को गिरफ्तार किया। दोनों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।


