सीजी भास्कर, 23 जनवरी। जंगल से नदी तक फैली तस्करी की एक सुनियोजित कोशिश उस वक्त नाकाम (Teak Wood Smuggling) हो गई, जब वन अमले की नजर समय रहते संदिग्ध गतिविधियों पर पड़ गई। कार्रवाई से तस्करों की पूरी योजना पर पानी फिर गया।
छत्तीसगढ़ के बालोद जिला में वन विभाग ने सागौन लकड़ी की तस्करी का बड़ा मामला उजागर करते हुए 21 बड़े सागौन के गोले जब्त किए हैं। यह कार्रवाई तांदुला नदी के किनारे, हर्रा–ठेमा वन क्षेत्र में की गई, जहां अवैध रूप से काटे गए सागौन के पेड़ों को पहले से गोलों के रूप में तैयार कर रखा गया था।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि तस्कर नदी के बहाव का उपयोग कर सागौन की लकड़ी को नीचे की ओर बहाकर ले जाने की योजना बना रहे थे। इस तरीके से लकड़ी को वन नाकों और सड़कों से बचाते (Teak Wood Smuggling) हुए बालोद तक पहुंचाने की तैयारी थी। हालांकि, वन विभाग की सतर्कता के चलते तस्करी से पहले ही लकड़ी को जब्त कर लिया गया।
वन विभाग के अनुसार, यह लकड़ी किसी ठेकेदार द्वारा अवैध रूप से कटाई कर एकत्र की गई थी। मौके से लकड़ी बरामद कर वन अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज कर लिया गया है और तस्करी से जुड़े लोगों की पहचान की जा रही है।
इस कार्रवाई के बाद जिले में वन विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। इससे पहले भी कुछ मामलों में विभागीय अधिकारियों पर पद के दुरुपयोग और अवैध गतिविधियों से जुड़ने के आरोप लगते (Teak Wood Smuggling) रहे हैं। ऐसे में इस ताजा मामले में भी मिलीभगत की आशंका से इनकार नहीं किया जा रहा और जांच के दौरान इस पहलू को भी खंगाला जा रहा है।
वन अधिकारियों का कहना है कि मामले की गहन जांच की जा रही है और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि अवैध लकड़ी कटाई और तस्करी के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा।


