सीजी भास्कर 25 जनवरी। जिस ऐप को करोड़ों लोग अपनी निजी बातचीत का सबसे सुरक्षित जरिया (WhatsApp Privacy Case) मानते हैं, उसी की गोपनीयता पर अब कानूनी शिकंजा कसता नजर आ रहा है। WhatsApp की प्राइवेसी को लेकर अमेरिका की अदालत में दर्ज एक मुकदमे ने यूजर्स की चिंता बढ़ा दी है।
अमेरिका में दर्ज नए मुकदमे में Meta और WhatsApp पर आरोप लगाया गया है कि कंपनी यूजर्स को मैसेज प्राइवेसी को लेकर भ्रमित कर रही है। शिकायत के अनुसार, WhatsApp जिन एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन दावों के साथ खुद को पूरी तरह सुरक्षित बताता है, वे व्यवहारिक रूप से उतने अचूक नहीं हैं जितना प्रचार किया जाता है।
मुकदमे में दावा किया गया है कि WhatsApp के पास तकनीकी रूप से यूजर्स के मैसेज को स्टोर करने और उन तक पहुंच बनाने की क्षमता मौजूद है। आरोप है कि ऐप को पूरी तरह निजी बताकर दुनियाभर के यूजर्स का भरोसा जीता गया, जबकि वास्तविकता इससे अलग हो सकती है।
इस केस में ऑस्ट्रेलिया, भारत, ब्राजील, मैक्सिको और साउथ अफ्रीका समेत कई देशों के यूजर्स को पक्षकार बनाया गया है। शिकायत में कुछ व्हिसल ब्लोअर्स का हवाला (WhatsApp Privacy Case) भी दिया गया है, जिन्होंने कथित तौर पर WhatsApp की अंदरूनी प्रणाली को उजागर करने की जानकारी दी है। हालांकि उनकी पहचान और साक्ष्यों को सार्वजनिक नहीं किया गया है।
WhatsApp लंबे समय से यह दावा करता रहा है कि उसके प्लेटफॉर्म पर भेजे गए मैसेज केवल भेजने और पाने वाले ही पढ़ सकते हैं, यहां तक कि कंपनी खुद भी उन तक पहुंच नहीं रखती। यही भरोसा WhatsApp को दुनिया का सबसे लोकप्रिय मैसेजिंग ऐप बनाता है।
वहीं Meta ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। कंपनी का कहना है कि WhatsApp पिछले एक दशक से Signal प्रोटोकॉल पर आधारित एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन का इस्तेमाल (WhatsApp Privacy Case) कर रहा है। Meta के प्रवक्ता एंडी स्टोन ने बयान जारी कर कहा कि यह मुकदमा तथ्यों से परे और निराधार है, और कंपनी इसका मजबूती से कानूनी जवाब देगी।
फिलहाल यह मामला अदालत में है, लेकिन इसने एक बार फिर यह बहस तेज कर दी है कि क्या डिजिटल दुनिया में कोई भी चैट वाकई पूरी तरह निजी रह पाती है या नहीं।




