सीजी भास्कर, 31 जनवरी | Old Mutation Cancelled : रायपुर संभागायुक्त महादेव कावरे ने महासमुंद जिले के बागबाहरा तहसील अंतर्गत ग्राम ओंकारबंद की भूमि से जुड़े 48 वर्ष पुराने नामांतरण को निरस्त करने का आदेश जारी किया है। यह निर्णय सभी उपलब्ध दस्तावेजों और रिकॉर्ड की विस्तृत जांच के बाद लिया गया है।
निसंतान बताकर कराया गया था नामांतरण
मामला 7.37 हेक्टेयर कृषि भूमि से संबंधित है, जिसका नामांतरण 21 अप्रैल 1978 को किया गया था। उस समय रिकॉर्ड में रंभाबाई, पति स्वर्गीय रामचरण को निसंतान दर्शाकर अन्य व्यक्तियों ने अपने पक्ष में भूमि दर्ज करा ली थी, जबकि वास्तविकता में उनका पुत्र उदेराम उस समय जीवित था।
अपीलकर्ता ने संभागायुक्त न्यायालय में रखे ठोस साक्ष्य
अपीलकर्ता बुढ़ान सिंह ने बताया कि उदेराम उनके दादा थे। उन्होंने इस मामले में पहले अनुविभागीय अधिकारी के समक्ष अपील दायर की थी, जिसे निरस्त कर दिया गया था। इसके बाद उन्होंने द्वितीय अपील रायपुर संभागायुक्त न्यायालय में प्रस्तुत की, जहाँ सभी दस्तावेजों की दोबारा समीक्षा की गई।
48 साल पुराने रिकॉर्ड को किया गया अमान्य
संभागायुक्त ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि जिस आधार पर नामांतरण किया गया था, वह तथ्यात्मक रूप से गलत था। जीवित उत्तराधिकारी के होते हुए निसंतान बताकर किया गया नामांतरण नियमों के विरुद्ध है, इसलिए उसे निरस्त किया जाना आवश्यक है।
तहसीलदार को सौंपी गई विस्तृत जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए संभागायुक्त ने संबंधित तहसीलदार को निर्देश दिए हैं कि पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच की जाए और जो भी अधिकारी या व्यक्ति दोषी पाए जाएँ, उनके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
पुराने भूमि रिकॉर्ड पर फिर उठे सवाल
यह मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि वर्षों पुराने भूमि रिकॉर्ड में की गई गड़बड़ियों का खामियाजा वास्तविक वारिसों को कैसे भुगतना पड़ता है। प्रशासनिक स्तर पर लिया गया यह फैसला भविष्य में ऐसे मामलों के लिए मिसाल माना जा रहा है।





