सीजी भास्कर, 04 फरवरी | Astronaut Shubhanshu Shukla Raipur Interaction : नवा रायपुर स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय राखी में छत्तीसगढ़ के पहले अंतरिक्ष केंद्र का शुभारंभ हुआ। इस ऐतिहासिक मौके पर अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की मौजूदगी ने कार्यक्रम को खास बना दिया। छात्रों में अंतरिक्ष विज्ञान को लेकर उत्सुकता साफ नजर आई।
छात्रों से सीधा संवाद, अंतरिक्ष अनुभवों की साझा कहानी
कार्यक्रम के दौरान Astronaut Shubhanshu Shukla Raipur Interaction के तहत छात्रों को सीधे सवाल पूछने का मौका मिला। शुभांशु शुक्ला ने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन से जुड़ी अपनी यात्रा, प्रशिक्षण और अनुभवों को बेहद सरल शब्दों में साझा किया, जिससे बच्चे खुद को उनसे जुड़ा महसूस कर सकें।
मेहनत या किस्मत? छात्रा के सवाल पर मिला सीधा जवाब
कॉमर्स संकाय की छात्रा काजल साहू ने पूछा कि सफलता में मेहनत और किस्मत का कितना योगदान होता है। इस पर शुभांशु शुक्ला ने कहा कि किस्मत कोई अलग चीज नहीं होती, वह मेहनत से ही बनती है। उन्होंने समझाया कि लगातार प्रयास और अनुशासन ही भविष्य की दिशा तय करते हैं.
‘राम-राम छत्तीसगढ़’ से जुड़ा भावनात्मक रिश्ता
कार्यक्रम की शुरुआत “राम-राम छत्तीसगढ़” कहकर करते हुए शुभांशु शुक्ला ने कहा कि राज्य के बच्चों में सीखने और आगे बढ़ने की गहरी इच्छा है। उन्होंने बताया कि पहले भी वे ऑनलाइन माध्यम से छत्तीसगढ़ के छात्रों से जुड़े थे और उनके सवालों ने उन्हें प्रभावित किया था।
चंद्रमा तक पहुंचने का सपना, छात्रा को मिला मार्गदर्शन
नौवीं कक्षा की छात्रा किरण भास्कर ने चंद्रमा पर जाने की इच्छा जताई। इस पर शुभांशु शुक्ला ने कहा कि बड़ा सपना देखने के साथ-साथ रोज की छोटी मेहनत भी उतनी ही जरूरी है। पढ़ाई, स्वास्थ्य और अनुशासन—तीनों पर ध्यान देना जरूरी है.
एस्ट्रोनॉट बनने की पहली शर्त क्या है?
एक अन्य सवाल पर उन्होंने बताया कि अंतरिक्ष मिशन के लिए मानसिक मजबूती बेहद अहम होती है। कठिन परिस्थितियों में शांत रहना और टीमवर्क सीखना जरूरी है। उनके अनुसार, अनुशासन ही किसी भी अंतरिक्ष यात्री की असली पहचान होती है।
पृथ्वी की सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी
शुभांशु शुक्ला ने पर्यावरण से जुड़े सवाल पर कहा कि अंतरिक्ष से देखने पर पृथ्वी बेहद खूबसूरत लगती है। इसलिए तकनीक के साथ-साथ प्रकृति की रक्षा करना हम सभी की जिम्मेदारी है.
320 परिक्रमा और देश के लिए गर्व का सफर
अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने बताया कि उन्होंने पृथ्वी की 320 बार परिक्रमा की और करीब 1.4 करोड़ किलोमीटर की दूरी तय की। यह यात्रा सिर्फ उनकी नहीं, बल्कि पूरे देश की थी।
अंतरिक्ष संगवारी बना प्रेरणा अभियान
कार्यक्रम में प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि ‘अंतरिक्ष संगवारी’ अब एक आंदोलन का रूप ले चुका है, जिसके जरिए सैकड़ों स्कूलों के छात्रों को अंतरिक्ष विज्ञान से जोड़ा जा रहा है। अब अंतरिक्ष केवल किताबों का विषय नहीं रहा।





