सीजी भास्कर, 07 फरवरी | राज्य में बीते छह वर्षों के भीतर ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन के मामले तेजी से बढ़े हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में 15 लाख से अधिक वाहन चालकों पर चालान बनाए गए, लेकिन इनमें से केवल 5 लाख लोगों ने ही जुर्माना अदा किया। शेष करीब 10 लाख चालान अब भी लंबित हैं, जिससे (Traffic E-Challan Pending) की स्थिति गंभीर होती जा रही है।
कैमरे से बचना अब मुश्किल
चौक-चौराहों, मुख्य सड़कों और टोल नाकों पर लगाए गए आईटीएमएस कैमरों ने निगरानी का दायरा 24 घंटे का कर दिया है। सड़क पर पुलिस न दिखे, फिर भी कैमरा वाहन की तस्वीर कैद कर लेता है और चालान की डिजिटल कॉपी सीधे वाहन मालिक के मोबाइल नंबर पर भेज दी जाती है। (Smart Traffic Surveillance) के बावजूद बड़ी संख्या में लोग चालान भरने से बचते नजर आ रहे हैं।
160 करोड़ से ज्यादा की रकम अटकी
लंबित चालानों की संख्या बढ़ने के साथ ही जुर्माने की रकम 160 करोड़ रुपए के पार पहुंच चुकी है। इनमें से 7 लाख से ज्यादा चालान ट्रैफिक पुलिस द्वारा किए गए हैं, जबकि शेष मामले परिवहन विभाग से जुड़े हैं। (Pending Traffic Fine) अब प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।
बाइक से लेकर भारी वाहन तक नजर
ऑनलाइन सिस्टम के जरिए ट्रैफिक पुलिस कार, भारी वाहन, बाइक और मोपेड—सभी पर समान रूप से कार्रवाई कर रही है। बीते छह साल में केवल ट्रैफिक पुलिस के माध्यम से 12 लाख से अधिक चालान जारी किए जा चुके हैं। वहीं परिवहन विभाग का फोकस फिटनेस, परमिट और दस्तावेजों से जुड़े मामलों पर रहता है।
इन गलतियों पर कटता है चालान
- बिना हेलमेट बाइक या मोपेड चलाने पर
- कार में सीट बेल्ट न लगाने पर
- नो-पार्किंग जोन में वाहन खड़ा करने पर
- रॉन्ग साइड वाहन चलाने पर
- सिग्नल जंप करने पर
- तेज रफ्तार में वाहन चलाने पर
- नशे की हालत में ड्राइविंग पर
- ट्रिपल सवारी करने पर
आरटीओ की कार्रवाई
- फिटनेस और प्रदूषण प्रमाणपत्र नहीं होने पर
- टैक्सी परमिट रिन्यू न कराने पर
- वाहन का वैध बीमा न होने पर
बदला पता-नंबर तो ऐसे करें अपडेट
कई वाहन चालकों के पते या मोबाइल नंबर बदल चुके हैं, जिस कारण चालान जनरेट होने के बावजूद उन तक नहीं पहुंच पा रहे। ऐसे में वाहन मालिक परिवहन विभाग के ऑनलाइन पोर्टल पर जाकर राज्य चयन, वाहन सेवा विकल्प और जिले का चयन कर पता व मोबाइल नंबर अपडेट कर सकते हैं। इससे भविष्य के चालान सीधे प्राप्त होंगे।
नंबर प्लेट से पूरी पहचान
2012 के बाद पंजीकृत अधिकांश वाहनों का स्थायी पता, मोबाइल नंबर और पहचान विवरण पहले से ही विभागीय रिकॉर्ड में मौजूद है। कैमरे द्वारा नंबर प्लेट कैप्चर होते ही सिस्टम वाहन मालिक की पहचान कर लेता है और चालान स्वतः जनरेट हो जाता है। यही वजह है कि कैमरा निगरानी के बाद चालानी कार्रवाई में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है।




