सीजी भास्कर 8 फरवरी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग के समक्ष गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि Form 7 Misuse SIR के जरिए कई जिलों में पात्र मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिशें सामने आ रही हैं, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए खतरे का संकेत है।
प्रशासनिक दबाव बनाकर कराई जा रही आपत्तियां
दीपक बैज का आरोप है कि सत्ताधारी दल प्रशासनिक अधिकारियों पर दबाव बनाकर फार्म-7 के माध्यम से बड़े पैमाने पर आपत्तियां दर्ज करवा रहा है। कई मामलों में न तो शिकायतकर्ता की पहचान स्पष्ट है और न ही आपत्ति के पीछे कोई वैध आधार प्रस्तुत किया गया है। इसे उन्होंने (electoral process manipulation) करार दिया।
अनधिकृत लोगों से भरवाए जा रहे आवेदन
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि अनेक स्थानों पर ऐसे लोगों द्वारा आपत्तियां दी जा रही हैं, जिनका संबंधित मतदाता से कोई लेना-देना नहीं है। इतना ही नहीं, आपत्तियां ऐसे अधिकारियों को सौंपी जा रही हैं जिन्हें कानूनन यह अधिकार प्राप्त नहीं है। यह स्थिति (illegal voter deletion attempt) की ओर इशारा करती है।
अस्तित्वहीन शिकायतकर्ताओं पर भी दर्ज हो रही आपत्तियां
दीपक बैज के अनुसार, कई मामलों में जिनके नाम से शिकायत दर्ज कराई गई है, उनका कोई वास्तविक अस्तित्व ही नहीं है। जहां शिकायतकर्ता मौजूद हैं, वहां प्रस्तुत तथ्य गलत और भ्रामक पाए गए हैं। उन्होंने मांग की कि ऐसी सभी आपत्तियों को तत्काल निरस्त किया जाए।
बीएलओ और निर्वाचन अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश की मांग
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने चुनाव आयोग से आग्रह किया है कि बीएलओ और निर्वाचन अधिकारियों को लिखित दिशा-निर्देश जारी किए जाएं। उन्होंने कहा कि बिना ठोस प्रमाण, पहचान सत्यापन और मौके पर जांच के फार्म-7 स्वीकार न किए जाएं, ताकि (voter list transparency) बनी रहे।
लोकतंत्र की जड़ों पर हमला बताया
दीपक बैज ने कहा कि मतदाता सूची से नाम हटाना केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि नागरिक के संवैधानिक अधिकार से जुड़ा विषय है। यदि इसमें लापरवाही या राजनीतिक हस्तक्षेप हुआ, तो यह लोकतंत्र की जड़ों को कमजोर करेगा।




