सीजी भास्कर, 08 फरवरी। Enforcement Directorate (ईडी) ने असम सरकार के लोक निर्माण विभाग (सड़क) के पूर्व कार्यकारी अभियंता मोहम्मद चामेद अली और उनके परिजनों की करीब 3.07 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क (PWD Corruption Case) कर ली हैं। ईडी की जांच में सामने आया है कि आरोपी ने अपने पद का दुरुपयोग कर ठेकेदारों से अवैध रूप से पैसा वसूला और उसे एक अनपढ़ महिला के नाम खुले बैंक खाते में जमा कराया।
ईडी ने यह कार्रवाई Chief Minister’s Special Vigilance Cell, Assam Police द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर की है, जिसमें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था।
आय 2.01 करोड़, खर्च 4.27 करोड़
जांच में सामने आया कि मोहम्मद चामेद अली ने 1 जनवरी 2000 से 28 फरवरी 2021 तक असम सरकार के पीडब्ल्यूडी (सड़क) विभाग में सहायक अभियंता से लेकर कार्यकारी अभियंता तक विभिन्न पदों पर रहते हुए 3.07 करोड़ रुपये की अनुपातहीन संपत्ति अर्जित की। यह उनकी ज्ञात आय से 152.96 प्रतिशत अधिक थी।
जांच अवधि में उनकी कुल वैध आय 2.01 करोड़ रुपये आंकी गई, जबकि खर्च 4.27 करोड़ रुपये तक (PWD Corruption Case) पहुंच गया। इस तरह 2.26 करोड़ रुपये की नकारात्मक बचत सामने आई, जिसका वे कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सके।
तीन चरणों में किया गया मनी लॉन्ड्रिंग
ईडी की जांच में मनी लॉन्ड्रिंग का पूरा तंत्र उजागर हुआ।
पहले चरण में 92.3 लाख रुपये नकद एक निरक्षर महिला, जो छोटी किराने की दुकान चलाती थी, के नाम खुले बैंक खाते में जमा कराए गए। इससे पहले भी संबंधित ठेकेदारों ने उसी खाते में 41.3 लाख रुपये जमा किए थे।
दूसरे चरण में ऑडिट ट्रेल छिपाने के लिए रकम को परिवार के सदस्यों और रिश्तेदारों के खातों में भेजा गया। आरोपी की पत्नी को बहनोई (जो स्वयं पीडब्ल्यूडी ठेकेदार हैं) से 28.16 लाख रुपये “उपहार” के रूप में मिले। इसके अलावा आरके इंडस्ट्रीज और अन्य माध्यमों से भी लाखों रुपये ट्रांसफर किए गए।
तीसरे चरण में इस रकम को तीन-स्तरीय स्वामित्व संरचना के जरिए महंगी अचल संपत्तियों (PWD Corruption Case) में बदला गया, ताकि असली मालिकाना हक छिपाया जा सके। संपत्तियां आरोपी, उसकी पत्नी और बहनोई के नाम पर खरीदी गईं, जिन पर अपरिवर्तनीय पावर ऑफ अटॉर्नी भी बनाई गई थी।
कुर्क संपत्तियों का पूरा ब्यौरा
ईडी द्वारा अस्थायी रूप से कुर्क की गई संपत्तियों में 2.42 करोड़ रुपये मूल्य की पांच अचल संपत्तियां और 65 लाख रुपये की एलआईसी पॉलिसियां शामिल हैं। इस तरह कुल कुर्क संपत्ति का मूल्य 3.07 करोड़ रुपये हो गया है। मामले में आगे की जांच जारी है और ईडी अन्य संभावित लेन-देन की भी पड़ताल कर रही है।




