सीजी भास्कर, 09 फरवरी। जगदलपुर में केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah के एक दिवसीय दौरे से पहले हाई अलर्ट घोषित (Amit Shah Bastar Visit) कर दिया गया है। शहर को पूरी तरह सतर्क मोड पर रखा गया है। एक हजार से अधिक पुलिस जवानों के साथ सीआरपीएफ और जिला बल की टीमें तैनात की गई हैं।
लालबाग मैदान को बहुस्तरीय सुरक्षा घेरे में लेकर लगभग अभेद्य किले में तब्दील कर दिया गया है। दिल्ली से पहुंची विशेष सुरक्षा टीम ने मोर्चा संभाल लिया है। मां दंतेश्वरी एयरपोर्ट से कार्यक्रम स्थल तक हर गतिविधि पर कड़ी नजर रखी जा रही है। सुबह 10 बजे से दोपहर 3 बजे तक वीआईपी रूट बंद रहेगा और प्रमुख मार्गों पर ट्रैफिक एडवाइजरी लागू की गई है।
बस्तर को नक्सलवाद के अंतिम दौर में बताया जा रहा है। लगातार केंद्रीय नेतृत्व के दौरों से सुरक्षा बलों का मनोबल बढ़ा है। जंगलों और दुर्गम इलाकों में सर्च ऑपरेशन तेज किए गए हैं। नए सुरक्षा कैंप खुलने से अंदरूनी गांवों तक विकास की पहुंच बनी है। आत्मसमर्पण और मुठभेड़ों के चलते नक्सली नेटवर्क कमजोर पड़ा है, वहीं स्थानीय लोग अब शांति, शिक्षा और खेती को प्राथमिकता देने लगे हैं।
इसी बीच जगदलपुर में पुराने पुल से भारी वाहनों की आवाजाही को लेकर चिंता गहराती जा रही है। निर्माणाधीन नए पुल के चलते ट्रकों को जर्जर पुराने पुल से निकाला (Amit Shah Bastar Visit) जा रहा है। रात के समय बैरिकेड हटाकर वाहनों को पार कराया जाता है, जिससे हादसे का खतरा लगातार बना हुआ है। धूल, शोर और ट्रैफिक दबाव से स्थानीय लोग परेशान हैं और जनप्रतिनिधियों ने सख्त कदम उठाने की मांग तेज कर दी है।
शहर में एक प्रस्तावित वेब सीरीज के शीर्षक को लेकर भी विवाद गहराया हुआ है। ब्राह्मण समाज और सनातन संगठनों ने धार्मिक भावनाएं आहत करने का आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन किया है। एफआईआर की मांग के बीच पुलिस ने कानूनी जांच शुरू कर दी है और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
नारायणपुर क्षेत्र में मृतक स्तंभ की परंपरा आज भी जीवंत है। काष्ठ कला के जरिए व्यक्ति के जीवन को उकेरकर स्मृति के रूप में सुरक्षित रखा जाता है। यह परंपरा समाज के मार्गदर्शकों और विशिष्ट व्यक्तियों के सम्मान का प्रतीक मानी जाती है, जिसे स्थानीय शिल्पकार पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ा रहे हैं।
नारायणपुर में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बनी सड़क की गुणवत्ता पर भी सवाल उठे हैं। एक माह के भीतर ही डामरीकरण उखड़ने से ग्रामीणों में आक्रोश है। अस्थायी मरम्मत से असंतोष बढ़ा है और आंदोलन की चेतावनी दी गई है।
दंतेवाड़ा के आमदई माइंस में मजदूरों की हड़ताल पांचवें दिन (Amit Shah Bastar Visit) भी जारी है। खनन और परिवहन कार्य पूरी तरह ठप है, सैकड़ों ट्रक खड़े हैं और आर्थिक नुकसान बढ़ता जा रहा है। श्रेणी परिवर्तन की मांग पर मजदूर अड़े हैं, जबकि प्रबंधन पीछे हटने को तैयार नहीं है।
चित्रकोट जलप्रपात में लाखों रुपये खर्च कर लगाई गई तिरंगा लाइटिंग व्यवस्था बंद पड़ी है। पर्यटन को बढ़ावा देने की योजना अधूरी नजर आ रही है। ग्रामीणों ने खर्च की जांच की मांग उठाई है।
इधर, बस्तर के जंगलों में आग की घटनाओं पर काबू पाने के लिए तैनात फायर वॉचरों की संख्या को नाकाफी बताया जा रहा है। लाखों एकड़ वन क्षेत्र के लिए मात्र 148 फायर वॉचर होने से दुर्लभ वनस्पतियां खतरे में हैं।
इंद्रावती नदी और Chitrakote Waterfall के सूखने से बस्तर की पहचान पर संकट गहरा गया है। एनीकटों के सहारे जल आपूर्ति हो रही है। किसान लंबे समय से आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन ठोस समाधान अब तक नहीं निकला। ग्रामीणों का साफ कहना है—इंद्रावती बचेगी, तभी बस्तर बचेगा।




