सीजी भास्कर, 12 फरवरी। छत्तीसगढ़ में स्कूलों के फेयरवेल कार्यक्रमों और अन्य छात्र-आयोजित आयोजनों के दौरान बढ़ती स्टंटबाजी और जोखिमपूर्ण गतिविधियों को गंभीरता (School Farewell Party Rules) से लेते हुए राज्य बालक अधिकार संरक्षण आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने छात्रों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए स्कूल परिसरों में आयोजनों के लिए स्पष्ट और अनिवार्य सुरक्षा दिशा-निर्देश लागू करने की सिफारिश की है।
आयोग ने इस संबंध में लोक शिक्षण संचालनालय, सभी जिलों के कलेक्टरों और जिला शिक्षा अधिकारियों को पत्र जारी किया है। पत्र में कहा गया है कि छात्र-आयोजित किसी भी फेयरवेल या अन्य कार्यक्रम की पूर्व सूचना स्कूल प्रबंधन को देना अनिवार्य होगा और ऐसे आयोजन केवल शिक्षकों की निगरानी तथा निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत ही कराए जाएं।
सुरक्षा से समझौता नहीं
आयोग का मानना है कि किशोरावस्था में उत्साह और रोमांच स्वाभाविक (School Farewell Party Rules) है, लेकिन यह छात्रों की सुरक्षा के साथ समझौते का कारण नहीं बन सकता। यदि समय रहते इन गतिविधियों पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो यह गलत परंपरा का रूप ले सकती हैं और भविष्य में गंभीर दुर्घटनाओं का कारण बन सकती हैं।
शिकायत पर होगी कार्रवाई
दिशा-निर्देशों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी स्कूल में जोखिम भरे स्टंट, अनुचित गतिविधि या अनुशासनहीनता की शिकायत प्राप्त होती है, तो संबंधित संस्था प्रमुख से स्पष्टीकरण तलब किया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर चेतावनी जारी करने के साथ-साथ आगे की अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है।
इसके अलावा, छात्रों को जागरूक करने के लिए पुलिस अधिकारियों को भी स्कूलों में भेजे जाने का प्रावधान रखा गया है, ताकि वे विद्यार्थियों को सुरक्षा, कानून और अनुशासन के प्रति संवेदनशील बना सकें।
20 फरवरी तक मांगी रिपोर्ट
आयोग ने स्पष्ट किया है कि इन सिफारिशों पर की गई कार्रवाई की लिखित रिपोर्ट 20 फरवरी 2026 तक अनिवार्य (School Farewell Party Rules) रूप से प्रस्तुत की जाए। आयोग का उद्देश्य है कि स्कूलों में होने वाले सभी कार्यक्रम सुरक्षित, अनुशासित और गरिमापूर्ण वातावरण में आयोजित हों, जिससे छात्रों की सुरक्षा के साथ-साथ शैक्षणिक माहौल भी बना रहे।




