सीजी भास्कर, 13 फरवरी | बिलासपुर में नगर पालिक निगम बिलासपुर की सामान्य सभा के दौरान लिंगियाडीह (Municipal House Uproar) क्षेत्र में 175 से अधिक बेजा कब्जे हटाए जाने का मामला जोर-शोर से उठा। वार्ड पार्षद दिलीप पाटिल ने प्रभावित परिवारों का मुद्दा सदन में रखा, जिस पर सत्ता पक्ष के पार्षदों ने आपत्ति जताई। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई और सभा का माहौल पूरी तरह गरमा गया।
बहस इतनी बढ़ी कि सदन की कार्यवाही को कुछ समय के लिए स्थगित करना पड़ा। इसके विरोध में कांग्रेसी पार्षद सदन से बाहर निकल आए और लखीराम ऑडिटोरियम के मुख्य द्वार पर धरने पर बैठ गए। उनके साथ लिंगियाडीह के प्रभावित परिवार भी बड़ी संख्या में मौजूद रहे। प्रदर्शनकारियों ने निगम प्रशासन पर पुनर्वास के वादे से पीछे हटने का आरोप लगाया।
कांग्रेस पार्षदों का कहना है कि वार्ड क्रमांक 47 के लोग पिछले 84 दिनों से धरने (Municipal House Uproar) पर बैठे हैं। उनकी प्रमुख मांग है कि जहां से उन्हें हटाया गया है, उसी क्षेत्र में या उसके आसपास उन्हें पुनर्वास की सुविधा दी जाए। उनका आरोप है कि बिना वैकल्पिक व्यवस्था के लोगों को उजाड़ दिया गया, जो पूरी तरह अमानवीय है।
क्या है पूरा विवाद
लिंगियाडीह क्षेत्र में हाल ही में अतिक्रमण हटाओ अभियान के तहत 175 से अधिक निर्माण हटाए गए थे। प्रभावित परिवारों का दावा है कि वे वर्षों से वहां रह रहे थे और उनके पास स्थानीय स्तर पर रहने से जुड़े प्रमाण भी हैं। उनका कहना है कि अचानक कार्रवाई कर उन्हें बेघर कर दिया गया।
वहीं नगर निगम प्रशासन का पक्ष है कि यह कार्रवाई नियमों और शासकीय निर्देशों के अनुसार (Municipal House Uproar) की गई है। निगम अधिकारियों का कहना है कि पुनर्वास को लेकर अंतिम निर्णय शासन स्तर पर लिया जाएगा और फिलहाल प्रक्रिया जारी है।
हालांकि, सामान्य सभा में जिस तरह से यह मुद्दा फूटा, उससे साफ हो गया है कि लिंगियाडीह का मामला अब सिर्फ प्रशासनिक नहीं, बल्कि शहर की राजनीति का केंद्र बन चुका है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि निगम और शासन इस संकट का समाधान किस दिशा में करते हैं।




