सीजी भास्कर, 14 फरवरी। छत्तीसगढ़ के प्रमुख शहरों रायपुर, दुर्ग-भिलाई और बिलासपुर में व्यस्त चौक-चौराहों (Traffic Police Health Risk) पर तैनात ट्रैफिक पुलिस जवानों की सेहत पर वायु प्रदूषण का गंभीर असर सामने आया है। हालिया स्वास्थ्य जांच में सामने आया कि ड्यूटी पर तैनात करीब 36 प्रतिशत ट्रैफिक जवानों के फेफड़ों में संक्रमण के लक्षण पाए गए हैं, जबकि कई जवानों को सांस लेने में लगातार परेशानी हो रही है।
विशेषज्ञों की टीम ने तीनों शहरों में कुल 159 ट्रैफिक जवानों का ऑन-स्पॉट पल्मोनरी फंक्शन टेस्ट किया। जांच के दौरान जवानों ने सांस फूलना, खांसी, एलर्जी, सीने में जकड़न और लंबे समय से सर्दी-जुकाम जैसी समस्याओं की शिकायत की। कुछ जवानों ने स्वास्थ्य परीक्षण से इनकार भी किया और बताया कि नौकरी की मजबूरी के चलते वे खराब स्वास्थ्य के बावजूद रोजाना प्रदूषित माहौल में ड्यूटी कर रहे हैं।
जांच रिपोर्ट के मुताबिक, रायपुर में जांचे गए 52 जवानों में से 22 प्रतिशत को सांस से जुड़ी परेशानी और 6 प्रतिशत में गंभीर लक्षण () पाए गए। भिलाई में 46 जवानों की जांच में 32 प्रतिशत के फेफड़ों में संक्रमण (Traffic Police Health Risk) के संकेत मिले। वहीं, बिलासपुर में 61 जवानों की जांच की गई, जिनमें से 34 प्रतिशत को फेफड़ों से संबंधित समस्याएं पाई गईं। विशेषज्ञों का मानना है कि वाहनों से निकलने वाला धुआं और सड़कों की उड़ती धूल इन बीमारियों का मुख्य कारण है।
प्रदूषण के आंकड़े भी चिंता बढ़ाने वाले हैं। इन शहरों में पीएम 2.5 का औसत स्तर करीब 200 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर और पीएम 10 का स्तर 527 तक दर्ज किया गया, जो World Health Organization के तय मानकों से लगभग पांच गुना अधिक है। यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो स्वास्थ्य जोखिम और गंभीर हो सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार प्रदूषण बढ़ने के पीछे पुराने और अधिक प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की बड़ी भूमिका है। अकेले रायपुर में करीब 17 लाख वाहन (Traffic Police Health Risk) पंजीकृत हैं, जिनमें से लगभग 6 लाख वाहन 15 साल से ज्यादा पुराने बताए जा रहे हैं। कई वाहनों में अब तक डिजिटल नंबर प्लेट नहीं लगी है और नियमित प्रदूषण जांच भी नहीं हो पा रही है।
हवा की गुणवत्ता सुधारने के लिए केंद्र सरकार ने वित्त आयोग के तहत लगभग 300 करोड़ रुपये का फंड जारी किया है, जिसमें से 191 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। इसके अलावा National Clean Air Programme के तहत रायपुर और दुर्ग-भिलाई को विशेष सहायता भी दी गई है। बावजूद इसके, विशेषज्ञों का कहना है कि यदि प्रदूषण नियंत्रण के ठोस और प्रभावी कदम जल्द नहीं उठाए गए, तो ट्रैफिक जवानों के साथ-साथ आम नागरिकों की सेहत पर भी इसका गंभीर और दीर्घकालिक असर पड़ सकता है।




