सीजी भास्कर, 16 फरवरी। कोलकाता। पश्चिम बंगाल में 2026 विधानसभा चुनाव से पहले ममता बनर्जी सरकार की नई योजना ‘बांग्लार युवा साथी’ चर्चा के केंद्र (Unemployed Youth Scheme) में आ गई है। योजना के तहत 21 से 40 वर्ष की आयु के बेरोजगार युवाओं को हर महीने 1500 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। आवेदन प्रक्रिया शुरू होते ही राज्यभर में इसके लिए युवाओं की लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं।
राज्य सरकार ने इस योजना के लिए रविवार से नामांकन अभियान शुरू कर दिया है। इसके तहत 15 से 26 फरवरी तक पश्चिम बंगाल के सभी 294 विधानसभा क्षेत्रों में शिविर लगाए जा रहे हैं, जहां योग्य युवक-युवतियां आवेदन कर सकते हैं। सरकार का कहना है कि यह सहायता युवाओं को नौकरी तलाशने और कौशल प्रशिक्षण जारी रखने में मदद करेगी।
योजना के अनुसार माध्यमिक परीक्षा उत्तीर्ण और निर्धारित आयु सीमा में आने वाले बेरोजगार युवाओं को प्रति माह 1500 रुपये (Unemployed Youth Scheme) दिए जाएंगे। यह सहायता अधिकतम पांच वर्षों तक या फिर लाभार्थी को रोजगार मिलने तक प्रदान की जाएगी। सरकार ने योजना के तहत 1 अप्रैल से राशि का वितरण शुरू करने का निर्णय लिया है, जिसे पहले 15 अगस्त से शुरू किया जाना था।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक राज्यभर में लगभग 27 से 28 लाख युवा इस योजना के लिए पात्र हो सकते हैं। प्रशासन का दावा है कि बेरोजगारी दर राष्ट्रीय औसत से कम होने के बावजूद यह मासिक सहायता युवाओं को कम वेतन वाली अस्थायी नौकरियों में जाने से रोकेगी और उन्हें बेहतर अवसर तलाशने का समय देगी।
स्थानीय युवाओं और उनके परिजनों में योजना को लेकर उत्साह देखा (Unemployed Youth Scheme) जा रहा है। कई छात्रों का कहना है कि पढ़ाई के साथ खर्च चलाने में यह राशि सहायक साबित होगी। वहीं कुछ लोगों का यह भी कहना है कि सरकार को ऐसी योजनाओं के साथ रोजगार सृजन पर भी अधिक ध्यान देना चाहिए।
हालांकि राजनीतिक गलियारों में इस योजना को लेकर अलग-अलग राय सामने आ रही है। कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ‘बांग्लार युवा साथी’ योजना 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले युवाओं को आकर्षित करने की रणनीति का हिस्सा है। बावजूद इसके, जमीनी स्तर पर योजना को लेकर युवाओं की दिलचस्पी और भागीदारी साफ नजर आ रही है।





