सीजी भास्कर, 20 फरवरी | राजधानी रायपुर में कृषि विज्ञान केंद्रों से जुड़े अधिकारी-कर्मचारी (KVK Salary Dispute Protest) को लेकर लगातार पाँचवें दिन कामबंद रहे। वेतन विसंगति, सेवा-लाभ बहाली और पिछले 18 महीनों से अटके देयकों को लेकर धरना-प्रदर्शन जारी है। कर्मियों का कहना है कि बार-बार ज्ञापन देने के बावजूद समयबद्ध समाधान सामने नहीं आया, इसलिए आंदोलन को मजबूरी में आगे बढ़ाया गया।
कुलपति से बातचीत बेनतीजा
चौथे दिन प्रतिनिधिमंडल की कुलपति से वार्ता हुई, लेकिन ठोस रोडमैप नहीं मिल पाया। कर्मचारियों का आरोप है कि बातचीत में प्रक्रियागत औपचारिकताओं का हवाला दिया गया, जबकि भुगतान की समयसीमा तय नहीं की गई। इस रुख से नाराज़ कर्मियों ने कहा कि जब तक लिखित आश्वासन नहीं मिलेगा, (KVK Salary Dispute Protest) शांत नहीं होगा।
फेडरेशन का सख्त संदेश
छत्तीसगढ़ कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन के प्रांतीय संयोजक कमल वर्मा ने धरना स्थल पर पहुंचकर समर्थन जताया। उन्होंने कहा कि जिम्मेदारी राज्यपाल स्तर, वित्त विभाग और शासन के बीच टलती रही है; अब स्पष्ट निर्णय चाहिए। फेडरेशन ने संकेत दिया कि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन का दायरा राजधानी के प्रमुख प्रशासनिक केंद्रों तक बढ़ाया जाएगा।
ICAR के निर्देशों से बढ़ी कटौती
विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि कृषि विज्ञान केंद्रों को मिलने वाली राशि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के दिशा-निर्देशों पर निर्भर करती है। 20 अगस्त 2024 के बाद जारी निर्देशों से एनपीएस अंशदान, पेंशन अनुदान और कुछ भत्तों में कटौती हुई, जिससे वेतन संरचना प्रभावित हुई। कर्मचारियों के मुताबिक यही बदलाव (KVK Salary Dispute Protest) की जड़ है।
हाईकोर्ट के आदेश से अस्थायी राहत
कर्मचारियों की याचिका पर हाईकोर्ट से स्थगन आदेश मिलने के बाद विश्वविद्यालय ने 2024-25 में अपने संसाधनों से वेतन का अंतर वहन किया। प्रशासन का दावा है कि सीमित बजट के बावजूद भुगतान किया गया, पर दीर्घकालीन समाधान राज्य शासन और ICAR से अतिरिक्त मदद पर निर्भर है—यही वजह है कि (KVK Salary Dispute Protest) फिलहाल थमा नहीं।
2025-26 के लिए अतिरिक्त फंड की मांग
विश्वविद्यालय ने 2025-26 के लिए राज्य शासन से 3.50 करोड़ रुपये की सहायता मांगी है, ताकि नियमित वेतन भुगतान सुनिश्चित हो सके। कर्मियों का कहना है कि जब तक यह सहायता औपचारिक रूप से स्वीकृत नहीं होती, अनिश्चितता बनी रहेगी और आंदोलन जारी रहेगा।
सेवानिवृत्ति आयु पर स्थिति स्पष्ट
प्रशासन के मुताबिक KVK के गैर-शिक्षकीय संवर्ग की सेवानिवृत्ति आयु 62 वर्ष है, जबकि शिक्षकों के लिए 65 वर्ष का प्रावधान है। कर्मचारियों ने मांग की कि सेवा-लाभों में समानता पर भी विचार हो। यह मुद्दा भी (KVK Salary Dispute Protest) के प्रमुख बिंदुओं में शामिल है।
परिसर में धरने पर रोक, पढ़ाई का हवाला
प्रशासन ने छात्रावास और परीक्षाओं का हवाला देते हुए परिसर में धरने पर रोक लगाई है। कर्मचारियों का कहना है कि वे पढ़ाई प्रभावित नहीं करना चाहते, लेकिन उनकी मांगें अनसुनी रहीं तो आंदोलन को वैकल्पिक सार्वजनिक स्थलों तक ले जाना पड़ेगा।






