Mujgahan Police FIR Delay Case : रायपुर में लागू कमिश्नर प्रणाली के तहत अपराध नियंत्रण के बड़े दावे किए गए थे, लेकिन पश्चिम जोन के मुजगहन थाना क्षेत्र से सामने आए मामले ने इन दावों की ज़मीनी हकीकत पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि घटनाएं बढ़ रही हैं, जबकि त्वरित कार्रवाई की उम्मीद अब भी अधूरी दिख रही है.
चाकू दिखाकर जान से मारने की धमकी का आरोप
मुजगहन निवासी भागवत राम साहू ने झम्मन पाल और कमलेश पाल सहित कुछ नाबालिग युवकों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायत के मुताबिक आरोपी कई बार घर के आसपास आकर चाकू दिखाते हुए जान से मारने की धमकी देते हैं, जिससे परिवार में दहशत का माहौल बन गया है.
बच्चों तक पहुंची धमकियां, परिवार में डर का साया
पीड़ित परिवार का कहना है कि धमकियां केवल बड़ों तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि बच्चों को भी डराया-धमकाया गया। अश्लील गालियों और अपमानजनक टिप्पणियों के कारण मानसिक दबाव लगातार बढ़ रहा है। पीड़ितों के मुताबिक नशे की हालत में आरोपी अकसर इलाके में घूमते नजर आते हैं .
वीडियो सामने आने के बाद भी कार्रवाई पर सवाल
घटना से जुड़ा एक वीडियो सामने आने के बाद मामला और गंभीर हो गया है। वीडियो में कथित तौर पर कुछ युवक नशे की हालत में धमकियां देते नजर आ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे दृश्य प्रमाण होने के बावजूद एफआईआर दर्ज न होना पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है.
एफआईआर नहीं, बढ़ी नाराज़गी और असुरक्षा
पीड़ित पक्ष साहू समाज के लोगों के साथ मुजगहन थाना पहुंचा, लेकिन अब तक औपचारिक एफआईआर दर्ज न होने का आरोप लगाया जा रहा है। इस देरी से समाज के लोगों में नाराज़गी बढ़ी है और सुरक्षा को लेकर चिंता गहराई है। लोग मांग कर रहे हैं कि पीड़ित परिवार को तत्काल सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए.
प्रशासनिक जवाबदेही पर उठे सवाल
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि कमिश्नर प्रणाली लागू होने के बावजूद जमीनी स्तर पर शिकायतों पर त्वरित सुनवाई नहीं हो रही। इस घटना ने पुलिस प्रशासन की जवाबदेही और त्वरित कार्रवाई की व्यवस्था पर बहस छेड़ दी है। अब नजरें इस पर टिकी हैं कि प्रशासन पीड़ितों को कब तक राहत देता है .






