रायपुर। (PTRSU jaundice outbreak probe) के तहत Pt. Ravishankar Shukla University के नवीन कन्या छात्रावास में फैले पीलिया के मामलों को गंभीरता से लेते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने औपचारिक जांच शुरू कर दी है। गठित समिति को तीन सप्ताह के भीतर तथ्यात्मक रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है, ताकि (health safety audit) के तहत त्वरित सुधारात्मक कदम उठाए जा सकें।
दूषित पेयजल से संक्रमण की आशंका
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक छात्रावास में सप्लाई होने वाले पानी की गुणवत्ता पर सवाल उठे हैं। बड़ी संख्या में छात्राएं पीलिया की चपेट में आई हैं, जिनमें कुछ की स्थिति गंभीर बताई जा रही है। गंभीर मामलों का इलाज AIIMS Raipur में चल रहा है। इसे (contaminated drinking water) से जुड़ा सार्वजनिक स्वास्थ्य जोखिम माना जा रहा है।
जांच समिति में तीन प्रोफेसर शामिल
विश्वविद्यालय की ओर से गठित समिति में डॉ. शम्स परवेज़ (रसायन अध्ययनशाला), डॉ. ए.जे. डहरवाल (फार्मेसी संस्थान) और डॉ. रीता वेणुगोपाल (शारीरिक शिक्षा) को शामिल किया गया है। समिति को जल-आपूर्ति तंत्र, स्वच्छता व्यवस्था और निगरानी तंत्र की पड़ताल कर (campus hygiene review) के तहत जिम्मेदारियों की पहचान करने को कहा गया है।
छात्र संगठन के प्रदर्शन से बढ़ा दबाव
मामले को लेकर NSUI ने परिसर में प्रदर्शन किया। संगठन का आरोप है कि शुरुआत में स्थिति को गंभीरता से नहीं लिया गया। डॉक्टरों की टीम को समय पर प्रवेश न मिलने की शिकायत भी सामने आई, जिसे (administrative lapse) के तौर पर देखा जा रहा है।
स्वास्थ्य टीम की तैनाती और एहतियाती कदम
प्रशासन ने छात्रावास में स्वास्थ्य परीक्षण शिविर, पानी के सैंपल की जांच और अस्थायी वैकल्पिक जल-आपूर्ति की व्यवस्था शुरू की है। साथ ही, संक्रमित छात्राओं के संपर्क में रहे लोगों की स्क्रीनिंग की जा रही है। यह कदम (outbreak control measures) के तहत उठाए गए हैं।
रिपोर्ट के बाद तय होगी जवाबदेही
अधिकारियों के अनुसार समिति की रिपोर्ट मिलने के बाद दोषियों की पहचान कर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए (campus water safety policy) को सख्ती से लागू करने की तैयारी है।






