हाईप्रोफाइल ड्रग्स तस्करी प्रकरण में आरोपी नव्या मलिक और विधि अग्रवाल को जमानत मिलने के बाद केस फिर सुर्खियों में है। चार्जशीट में टेक्नो पार्टियों, विदेशी संपर्क और 320 लोगों की सूची का जिक्र है, लेकिन (High Profile Drugs Case India) में सूचीबद्ध किसी नाम से अब तक औपचारिक पूछताछ नहीं हो पाई है। यही देरी अब जांच की गंभीरता पर सवाल खड़े कर रही है।
फार्महाउस से क्लब तक—ऑर्डर पर सप्लाई का नेटवर्क
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, ड्रग्स की सप्लाई दिल्ली–हरियाणा से मंगाकर फार्महाउस, रिसॉर्ट और क्लबों में होने वाली टेक्नो पार्टियों तक पहुंचाई जाती थी। एक आरोपी इवेंट मैनेजमेंट से जुड़ी बताई गई, जबकि दूसरी के प्रभावशाली संपर्कों की चर्चा चार्जशीट में है। जांच अधिकारी मानते हैं कि यह पूरा मॉडल (party drug network) पर टिका था—ऑर्डर आए, सप्लाई गई, और पार्टी खत्म।
चैट और ट्रांजेक्शन से बनी 320 लोगों की लिस्ट
मोबाइल चैट्स, कॉल-लॉग्स और ट्रांजेक्शन डिटेल के आधार पर 320 नामों की सूची तैयार की गई थी। पुलिस की शुरुआती योजना इन सभी को बुलाकर काउंसिलिंग/वेरिफिकेशन की थी, लेकिन फिलहाल फाइलें आगे नहीं बढ़ीं। सूत्रों के मुताबिक, सूची में कुछ प्रभावशाली परिवारों से जुड़े नाम होने की चर्चा है, जिससे (investigation delay) की अटकलें तेज़ हो गई हैं।
23 अगस्त की गिरफ्तारी से खुली कड़ी, 43 हिरासत में
मामले की नींव 23 अगस्त को पड़ी—हरियाणा निवासी एक युवक ड्रग्स के साथ पकड़ा गया। पूछताछ में सप्लाई चैन की कड़ियां खुलती गईं, मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी हुई और कुल 43 लोगों को हिरासत में लिया गया। पुलिस ने एक करोड़ रुपये से अधिक कीमत के नशीले पदार्थ जब्त करने का दावा किया है—यही जब्ती इस केस को (high-value narcotics bust) की श्रेणी में ले आती है।
विदेश यात्राओं का जिक्र, आगे की कार्रवाई पर नजर
चार्जशीट में तुर्की और दुबई समेत विदेश यात्राओं का उल्लेख है, जिससे नेटवर्क के ट्रांसनेशनल लिंक की पड़ताल जरूरी हो जाती है। पुलिस का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे कार्रवाई होगी। फिलहाल सवाल यही है—320 नामों की सूची कब ज़मीन पर उतरेगी और (case follow-up action) कब दिखेगा?






