सीजी भास्कर, 28 फरवरी। सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम को राष्ट्रीय प्राथमिकता देते हुए केंद्र सरकार ने देशव्यापी ह्यूमन पैपिलोमावायरस (एचपीवी) टीकाकरण अभियान (HPV Vaccine Free India) की शुरुआत की है। इस पहल के तहत 14 वर्ष की लगभग 1.15 करोड़ किशोरियों को सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर मुफ्त एचपीवी वैक्सीन उपलब्ध कराई जाएगी। यह अभियान स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की देखरेख में चलाया जा रहा है, जिसका उद्देश्य कम उम्र में ही संक्रमण से सुरक्षा प्रदान कर भविष्य में सर्वाइकल कैंसर के मामलों को कम करना है।
मंत्रालय के अनुसार, सरकारी केंद्रों पर गार्डासिल-4 टीका उपलब्ध कराया जाएगा। विशेषज्ञों का कहना है कि टीकाकरण के साथ नियमित स्क्रीनिंग भी उतनी ही जरूरी है। भारत में महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर दूसरा सबसे आम कैंसर है और हर वर्ष लगभग 80 हजार नए मामले दर्ज होते हैं, जबकि 42 हजार से अधिक महिलाओं की मृत्यु इस बीमारी से होती है। ऐसे में व्यापक टीकाकरण अभियान को सार्वजनिक स्वास्थ्य की दृष्टि से अहम कदम माना जा रहा है।
विशेषज्ञों के मुताबिक 9 से 14 वर्ष की आयु की लड़कियों को एचपीवी वैक्सीन अवश्य लगवानी चाहिए। 14 वर्ष तक की आयु में एक डोज पर्याप्त मानी (HPV Vaccine Free India) जाती है, जबकि 15 वर्ष या उससे अधिक आयु की किशोरियों को 2 से 3 डोज की आवश्यकता हो सकती है। यह वैक्सीन 26 वर्ष की आयु तक सर्वाधिक प्रभावी मानी जाती है। चिकित्सकों के अनुसार एचपीवी वैक्सीन केवल सर्वाइकल कैंसर ही नहीं, बल्कि गले और अन्य कुछ कैंसर से भी बचाव में सहायक हो सकती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यौन संबंध के बाद असामान्य रक्तस्राव, मासिक धर्म के बीच अनियमित ब्लीडिंग, दुर्गंधयुक्त स्राव या रजोनिवृत्ति के बाद रक्तस्राव जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। 30 वर्ष की आयु के बाद महिलाओं को नियमित स्क्रीनिंग कराने की सलाह दी जाती है, ताकि बीमारी की शुरुआती अवस्था में पहचान कर समय पर उपचार संभव हो सके। शुरुआती चरण में सर्जरी प्रभावी रहती है, जबकि उन्नत अवस्था में कीमोथेरेपी की आवश्यकता पड़ सकती है।
सरकार ने अभिभावकों से अपील की है कि वे निर्धारित आयु वर्ग की बच्चियों का टीकाकरण सुनिश्चित करें और जागरूकता बढ़ाने में सहयोग (HPV Vaccine Free India) करें। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि टीकाकरण और स्क्रीनिंग दोनों को व्यापक स्तर पर अपनाया गया, तो आने वाले वर्षों में सर्वाइकल कैंसर से होने वाली मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।



