त्योहारों से पहले शहर की सड़कों पर सुरक्षा का घेरा कस दिया गया है। पुलिस ने (Road Safety Drive) के तहत नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने पर खास नजर रखी। चेकिंग पॉइंट्स पर अचानक हुई कार्रवाई में कई किशोर तेज रफ्तार और नियमों की अनदेखी करते पकड़े गए—यही वजह है कि Raigarh Minor Driving Crackdown शहरभर में चर्चा का विषय बन गया।
चौक-चौराहों पर अचानक चेकिंग
कोतवाली, चक्रधरनगर और जूटमिल थाना क्षेत्रों के व्यस्त चौक-चौराहों पर टीमों ने एक साथ जांच शुरू की। हेलमेट न पहनना, ट्रिपल राइडिंग और साइलेंसर मॉडिफिकेशन जैसी शिकायतें सामने आईं। मौके पर 40 नाबालिग वाहन चालकों को रोका गया और दस्तावेजों की पड़ताल की गई—यह Raigarh Minor Driving Crackdown की रीढ़ रहा।
परिजनों को थाने बुलाकर चालान
पकड़े गए सभी किशोरों के अभिभावकों को थाने बुलाया गया। मोटर व्हीकल एक्ट के तहत प्रत्येक मामले में जुर्माना लगाया गया और भविष्य के लिए स्पष्ट चेतावनी दी गई। पुलिस का संदेश साफ था—अगर दोबारा नाबालिग ड्राइविंग पकड़ी गई तो वाहन जब्ती और अभिभावकों पर कानूनी कार्रवाई होगी। यह Raigarh Minor Driving Crackdown का अहम हिस्सा बना।
क्यों जरूरी है यह सख्ती
अधिकारी मानते हैं कि कम उम्र में वाहन चलाने से दुर्घटना का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। त्योहारों के दौरान सड़कों पर भीड़ बढ़ती है, ऐसे में जरा-सी चूक बड़ी अनहोनी में बदल सकती है। यही वजह है कि पुलिस ने (Accident Prevention) को प्राथमिकता दी—और Raigarh Minor Driving Crackdown को ज़ीरो-टॉलरेंस मोड में लागू किया।
अभिभावकों से सीधी अपील
पुलिस ने परिजनों से कहा कि बच्चों को वाहन सौंपना कानूनन अपराध ही नहीं, नैतिक जोखिम भी है। घर से निकलते वक्त बच्चों को ट्रैफिक नियम समझाना, हेलमेट-सीटबेल्ट की आदत डालना और लाइसेंस की वैध उम्र तक इंतजार करवाना जरूरी है। यह Raigarh Minor Driving Crackdown की सामाजिक जिम्मेदारी वाला पक्ष है।
आगे भी जारी रहेगा अभियान
वरिष्ठ अधिकारियों ने साफ किया कि यह एक दिन की कार्रवाई नहीं है। आने वाले दिनों में विशेष टीमें स्कूल-कॉलेज रूट्स और बाजार इलाकों में चेकिंग बढ़ाएंगी। मॉडिफाइड साइलेंसर और ओवरस्पीडिंग पर भी फोकस रहेगा। उद्देश्य एक ही है—सड़कों पर अनुशासन और सुरक्षा, यानी Raigarh Minor Driving Crackdown को लगातार मजबूत करना।






