सीजी भास्कर 1 मार्च भानुप्रतापपुर की सुबह आज एक अलग ही ऊर्जा के साथ शुरू हुई। शहीद भगत सिंह क्लब के तत्वावधान में आयोजित मैराथन में आम प्रतिभागियों के साथ-साथ वे युवा भी दौड़े, जिन्होंने हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा अपनाई है। आयोजकों का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य खेल के माध्यम से पुनर्वास और सामाजिक स्वीकार्यता (Rehabilitation Through Sports) को मजबूत करना है।
प्रदेशभर से आए धावकों में दिखी कड़ी प्रतिस्पर्धा
निर्धारित समय पर शुरू हुई दौड़ में महिला और पुरुष—दोनों वर्गों में जोश साफ नजर आया। अलग-अलग जिलों से पहुंचे धावकों ने पूरी ताकत झोंक दी। अंततः दोनों वर्गों में भिलाई के प्रतिभागियों ने शीर्ष स्थान हासिल किया। आयोजकों के अनुसार, प्रतिस्पर्धा का स्तर ऊंचा रहा, जिससे युवाओं में खेल के प्रति रुझान (Rehabilitation Through Sports) और बढ़ा।
300 से अधिक प्रतिभागी, बदले जीवनों का आत्मविश्वास
इस मैराथन में करीब 300 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। इनमें कुछ ऐसे लोग भी शामिल थे, जिन्होंने आत्मसमर्पण के बाद नई शुरुआत की है। उनके लिए यह दौड़ केवल एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि समाज के साथ फिर से कदम मिलाने का अवसर थी। दर्शकों ने तालियों से उनका हौसला बढ़ाया, जिससे कार्यक्रम का संदेश और मजबूत हुआ।
जनप्रतिनिधियों ने बढ़ाया हौसला
कार्यक्रम में क्षेत्र की विधायक सावित्री मंडावी मुख्य अतिथि रहीं। उन्होंने हरी झंडी दिखाकर दौड़ का शुभारंभ किया और प्रतिभागियों से संवाद किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि खेल केवल शरीर नहीं, सोच भी बदलता है; ऐसे आयोजन युवाओं को सकारात्मक दिशा देने के साथ-साथ सामाजिक एकजुटता (Rehabilitation Through Sports) को मजबूत करते हैं।
समाज के लिए सकारात्मक संदेश
आयोजकों का मानना है कि इस तरह की पहलें पूर्व हिंसाग्रस्त युवाओं के पुनर्वास में भरोसा पैदा करती हैं। मैदान पर साथ दौड़ते हुए सामान्य प्रतिभागी और पुनर्वास की राह चुन चुके युवा—दोनों के बीच की दूरी कम होती दिखी। यह दृश्य समाज के लिए उम्मीद का संकेत है और बताता है कि सही मंच मिले तो बदलाव संभव है।






