छत्तीसगढ़ में (Chhattisgarh Rajya Sabha Election 2026) को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। राज्य की दो राज्यसभा सीटों के लिए कांग्रेस और भाजपा दोनों ने अपने उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं। कांग्रेस ने मौजूदा सांसद फूलो देवी नेताम को एक बार फिर मौका देकर अपने भरोसे को दोहराया है, जबकि भारतीय जनता पार्टी ने लक्ष्मी वर्मा को मैदान में उतारकर मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है।
कांग्रेस ने दोबारा दिया मौका
कांग्रेस ने फूलो देवी नेताम को फिर से उम्मीदवार बनाकर साफ संकेत दिया है कि पार्टी उनके संगठनात्मक अनुभव और सामाजिक पकड़ पर भरोसा कर रही है। वर्तमान में वे प्रदेश महिला कांग्रेस की अध्यक्ष भी हैं। पार्टी के भीतर कई बड़े नामों पर चर्चा हुई थी, लेकिन अंत में नेतृत्व ने फूलो देवी नेताम के नाम पर सहमति जताई। इस फैसले को संगठन और महिला नेतृत्व को मजबूत करने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
इन नामों पर भी चल रही थी चर्चा
उम्मीदवार तय होने से पहले कांग्रेस में कई दिग्गज नेताओं के नाम सामने आए थे। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज, पूर्व अध्यक्ष मोहन मरकाम, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और वरिष्ठ नेता टीएस सिंह देव जैसे नाम राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बने रहे। हालांकि अंततः पार्टी ने अनुभव और संगठनात्मक संतुलन को ध्यान में रखते हुए फूलो देवी नेताम को उम्मीदवार घोषित कर दिया।
भाजपा ने लक्ष्मी वर्मा को दिया टिकट
वहीं भाजपा ने भी रणनीतिक तौर पर महिला चेहरे पर दांव लगाया है। पार्टी ने (BJP Rajya Sabha Candidate) के रूप में लक्ष्मी वर्मा को उम्मीदवार बनाया है। वे करीब तीन दशक से सक्रिय राजनीति में हैं और संगठन के विभिन्न दायित्वों में काम कर चुकी हैं। बताया जा रहा है कि भाजपा नेतृत्व ने सामाजिक समीकरण और महिला प्रतिनिधित्व को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया।
तीन नामों के पैनल में से चुना गया उम्मीदवार
भाजपा में राज्यसभा उम्मीदवार के चयन को लेकर सात संभावित नामों पर चर्चा हुई थी। बाद में पार्टी नेतृत्व ने तीन नामों का पैनल तैयार किया, जिसमें लक्ष्मी वर्मा, नारायण चंदेल और डॉ. कृष्णमूर्ति बांधी शामिल थे। अंततः केंद्रीय नेतृत्व ने लक्ष्मी वर्मा के नाम पर मुहर लगाई और उन्हें चुनावी मैदान में उतारा।
नामांकन के साथ चुनावी प्रक्रिया तेज
दोनों उम्मीदवार आज नामांकन दाखिल करेंगे, जिसके बाद राज्यसभा चुनाव की औपचारिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि छत्तीसगढ़ की विधानसभा में वर्तमान संख्या बल के आधार पर मुकाबला काफी हद तक स्पष्ट दिखता है, लेकिन चुनावी गणित को लेकर दलों की रणनीति पर सभी की नजर बनी हुई है।
कैसे होता है राज्यसभा का चुनाव
राज्यसभा के चुनाव सामान्य चुनावों से अलग होते हैं। इसमें जनता सीधे मतदान नहीं करती, बल्कि राज्य के विधायक अपने वोट के जरिए सांसदों का चुनाव करते हैं। इस प्रक्रिया को (Rajya Sabha Election Process) कहा जाता है। राज्यसभा एक स्थायी सदन है, इसलिए इसके एक-तिहाई सदस्य हर दो साल में सेवानिवृत्त होते हैं और उसी के अनुसार चुनाव कराए जाते हैं।
छत्तीसगढ़ की सीटों का गणित
छत्तीसगढ़ से फिलहाल राज्यसभा में पांच सदस्य प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। इनमें से दो सांसदों का कार्यकाल 9 अप्रैल 2026 को समाप्त हो रहा है। अन्य सदस्यों में कांग्रेस के राजीव शुक्ला और रंजीत रंजन का कार्यकाल 2028 तक है, जबकि भाजपा के देवेन्द्र प्रताप सिंह 2030 तक राज्यसभा में बने रहेंगे।
जीत के लिए कितने वोट जरूरी
छत्तीसगढ़ विधानसभा में कुल 90 विधायक हैं और इस बार दो सीटों के लिए चुनाव होना है। चुनावी गणित के मुताबिक जीत के लिए आवश्यक मतों की संख्या एक तय फार्मूले से निकाली जाती है। कुल विधायकों को रिक्त सीटों में एक जोड़कर भाग दिया जाता है और उसमें एक जोड़ दिया जाता है। इस हिसाब से 90 को 3 से भाग देने पर 30 आता है और उसमें 1 जोड़ने के बाद आंकड़ा 31 हो जाता है। यानी किसी भी उम्मीदवार को जीत दर्ज करने के लिए कम से कम 31 प्रथम वरीयता वोट हासिल करने होंगे।





