नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज बढ़ोतरी ने वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ-साथ भारत में भी महंगाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है। हाल के कारोबारी सत्रों में कच्चा तेल 90 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है, जो करीब ढाई साल का उच्च स्तर माना जा रहा है। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यही रफ्तार जारी रही तो आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर भी असर दिखाई दे सकता है। फिलहाल बाजार में (Crude Oil Price Surge) को लेकर लगातार चर्चा तेज हो गई है।
मध्य पूर्व तनाव से प्रभावित हुआ तेल बाजार
विश्लेषकों के मुताबिक हाल के दिनों में मध्य पूर्व क्षेत्र में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बढ़ा दी है। खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाली आपूर्ति में संभावित बाधा ने बाजार में घबराहट पैदा कर दी है। यह मार्ग दुनिया की कुल तेल आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा संभालता है, इसलिए यहां की स्थिति का असर सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजार पर पड़ता है। इसी कारण वैश्विक बाजार में (Global Oil Market) में अस्थिरता देखने को मिल रही है।
ब्रेंट और डब्ल्यूटीआई दोनों में तेज उछाल
अंतरराष्ट्रीय आंकड़ों के अनुसार ब्रेंट क्रूड की कीमतें हालिया कारोबार के दौरान करीब 94 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं। वहीं अमेरिकी कच्चा तेल डब्ल्यूटीआई भी लगभग 90 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता देखा गया। विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले कई महीनों में यह सबसे बड़ा उछाल है। इसी वजह से ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े निवेशकों और विश्लेषकों की नजर अब (Brent Crude Price) की आगे की दिशा पर टिकी हुई है।
घरेलू बाजार में भी दिखा असर
अंतरराष्ट्रीय तेजी का असर भारत के घरेलू वायदा बाजार में भी दिखाई दे रहा है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ते हुए 8500 रुपये प्रति बैरल के स्तर को पार कर गईं। कारोबारी सत्र के दौरान यह करीब 8518 रुपये प्रति बैरल तक पहुंच गई, जिसे हाल के महीनों का उच्च स्तर माना जा रहा है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगर वैश्विक हालात लंबे समय तक ऐसे ही बने रहे तो यह कीमत आगे और बढ़ सकती है।
पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने की आशंका
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार करती हैं तो भारत में पेट्रोल और डीजल के दामों में बढ़ोतरी की संभावना बढ़ सकती है। हालांकि सरकार इस असर को कम करने के लिए वैकल्पिक आपूर्ति स्रोतों पर भी नजर रखे हुए है। रूस से सस्ते कच्चे तेल की खरीद और रणनीतिक भंडारण जैसे कदमों के जरिए घरेलू बाजार में दबाव कम करने की कोशिश की जा रही है। फिलहाल बाजार की नजर आने वाले हफ्तों में (Fuel Price Hike) की संभावनाओं पर टिकी हुई है।





