सीजी भास्कर, 2 मई । छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में रिश्तेदारी में की गई शादी को लेकर स्पष्ट निर्देश दिया है। अदालत ने मौसी की बेटी से विवाह को कानूनन अवैध करार दिया, लेकिन साथ ही महिला के गुजारा भत्ता के अधिकार को बरकरार रखा है। (Marriage with aunt’s daughter declared invalid)
मामले की पृष्ठभूमि : Marriage with aunt’s daughter declared invalid
यह मामला जांजगीर-चांपा जिले से जुड़ा है, जहां एक युवक ने वर्ष 2018 में अपनी मौसी की बेटी से विवाह किया था। शादी के कुछ समय बाद दोनों के बीच विवाद बढ़ गया, जिसके बाद पति ने फैमिली कोर्ट में याचिका दाखिल कर विवाह को शून्य घोषित करने की मांग की।
हाईकोर्ट का निर्णय
निचली अदालत ने स्थानीय परंपरा के आधार पर विवाह को वैध माना था, लेकिन हाईकोर्ट ने इस फैसले को पलट दिया। अदालत ने कहा कि हिंदू विवाह कानून के तहत यह संबंध निषिद्ध श्रेणी में आता है, इसलिए ऐसा विवाह वैध नहीं माना जा सकता।
गुजारा भत्ता का अधिकार बरकरार
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि भले ही विवाह को शून्य घोषित कर दिया गया हो, लेकिन महिला को गुजारा भत्ता पाने का अधिकार बना रहेगा। इस फैसले को सामाजिक और कानूनी दृष्टि से अहम माना जा रहा है, जो भविष्य में ऐसे मामलों के लिए मार्गदर्शन करेगा।


