दुर्ग जिले के समोदा और झेनझरी गांव के बीच स्थित एक फार्महाउस में अवैध अफीम की खेती उजागर होने के बाद प्रशासन ने इसे पूरी तरह खत्म करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीम ने पहले खेत में लगे पौधों को मैन्युअल तरीके से हटाने की कोशिश की, लेकिन बड़े क्षेत्र में फैली खेती के कारण बाद में बुलडोजर की मदद ली गई। अधिकारियों के अनुसार इस Opium Farming Action के तहत खेत में मौजूद सभी पौधों को नष्ट किया जा रहा है और कार्रवाई आगे भी जारी रह सकती है।
करीब 5 एकड़ से ज्यादा जमीन पर फैली थी खेती
जांच के दौरान पुलिस को खेत में करीब 5 एकड़ 62 डिसमिल क्षेत्र में अफीम के पौधे मिले। पुलिस के मुताबिक यहां लगभग 14 लाख 30 हजार पौधे लगे हुए थे, जिनका कुल वजन करीब 62 हजार किलोग्राम बताया गया है। जब्त किए गए पौधों की अनुमानित कीमत करीब 7 करोड़ 88 लाख रुपये आंकी गई है। इस पूरे मामले को Illegal Opium Cultivation का बड़ा मामला माना जा रहा है।
तीन आरोपी गिरफ्तार, दो की तलाश जारी
इस प्रकरण में पुलिस ने भाजपा नेता विनायक ताम्रकार, उसके सहयोगी विकास बिश्नोई और फार्महाउस के मुंशी मनीष ठाकुर को गिरफ्तार किया है। वहीं दो अन्य आरोपियों—आंचला राम और श्रवण बिश्नोई—की तलाश में पुलिस टीम राजस्थान भेजी गई है। अधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले की Police Investigation जारी है और आगे भी कुछ अहम खुलासे हो सकते हैं।
विधायक का बयान, शुरू हुई सियासी बहस
मामले के सामने आने के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। क्षेत्र के विधायक रिकेश सेन ने कहा कि गांव में अफीम की खेती पिछले चार साल से होने की बात सामने आ रही है, जबकि वर्तमान सरकार को बने अभी दो साल ही हुए हैं। उन्होंने कहा कि अगर पौधे तीन फीट तक बढ़ चुके हैं, तो यह साफ है कि खेती लंबे समय से चल रही थी। इस बयान के बाद मामले को लेकर Political Controversy भी तेज हो गई है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने भी किया गांव का दौरा
मामले के उजागर होने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल समोदा गांव पहुंचे थे। उन्होंने खेत का निरीक्षण कर ग्रामीणों से बातचीत की और प्रदेश में नशे के बढ़ते कारोबार को लेकर सरकार से सवाल उठाए। इसके बाद भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।
फरवरी में मिली थी सूचना, मार्च में हुई कार्रवाई
पुलिस को इस खेत में अफीम की खेती की जानकारी फरवरी महीने में मिली थी। इसके बाद कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए मार्च में खेत पर छापेमारी की गई और पूरे इलाके को पुलिस सुरक्षा में लिया गया। चूंकि खेती बड़े क्षेत्र में फैली हुई थी, इसलिए इसे पूरी तरह नष्ट करने में समय लग रहा है। प्रशासन का कहना है कि अवैध खेती को पूरी तरह खत्म करने तक कार्रवाई जारी रहेगी।


