सप्ताह की शुरुआत भारतीय शेयर बाजार के लिए काफी उतार-चढ़ाव भरी रही। सोमवार को बाजार खुलते ही तेज बिकवाली देखने को मिली और कुछ ही समय में निवेशकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। इस Stock Market Crash के दौरान बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप तेजी से घट गया और निवेशकों की संपत्ति में करीब 14 लाख करोड़ रुपये की कमी दर्ज की गई।
सेंसेक्स और निफ्टी में बड़ी गिरावट
कारोबार के शुरुआती घंटों में Sensex Nifty Fall साफ नजर आया। सेंसेक्स करीब 2400 अंक टूटकर 76,000 के आसपास आ गया, जबकि निफ्टी 50 भी लगभग 700 अंक गिरकर 23,750 के स्तर तक फिसल गया। बाजार में लगभग सभी सेक्टरों में कमजोरी रही। इंडिगो के शेयरों में लगभग 8 प्रतिशत तक गिरावट आई, वहीं टाटा स्टील, एलएंडटी, एसबीआई और मारुति सुजुकी जैसे बड़े शेयर भी दबाव में रहे।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल बना बड़ी वजह
विशेषज्ञों के अनुसार बाजार में आई इस बड़ी गिरावट की एक प्रमुख वजह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल है। Crude Oil Price Surge के चलते वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट और ब्रेंट क्रूड की कीमतें बढ़कर 118 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण तेल आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है, जिसका असर वैश्विक बाजारों पर भी दिखाई दे रहा है।
वैश्विक तनाव से निवेशकों में बढ़ी चिंता
मिडिल ईस्ट क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव ने दुनिया भर के निवेशकों को सतर्क कर दिया है। अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान के तेल ठिकानों पर हमलों की खबरों और उसके जवाब में ईरान की प्रतिक्रिया ने हालात को और जटिल बना दिया है। इस Middle East Tension के चलते वैश्विक बाजारों में भी अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।
रुपया कमजोर, विदेशी निवेशकों की निकासी तेज
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर भारतीय मुद्रा पर भी पड़ा है। डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होकर 92.19 के स्तर तक पहुंच गया, जिसे अब तक का सबसे निचला स्तर माना जा रहा है। इसके साथ ही विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भी बाजार से निवेश कम करना शुरू कर दिया है। मार्च के शुरुआती दिनों में ही विदेशी निवेशकों ने हजारों करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए हैं।
एशियाई बाजारों में भी दिखी भारी गिरावट
इस गिरावट का असर केवल भारत तक सीमित नहीं रहा। एशिया के अन्य प्रमुख बाजारों में भी कमजोरी देखी गई। जापान का निक्केई इंडेक्स लगभग 6 प्रतिशत और दक्षिण कोरिया का कोस्पी करीब 8 प्रतिशत तक गिर गया। हांगकांग और चीन के बाजारों में भी दबाव बना रहा।
विशेषज्ञों की सलाह—घबराने के बजाय रखें धैर्य
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि भू-राजनीतिक तनाव का असर अक्सर अस्थायी होता है। ऐसे में निवेशकों को जल्दबाजी में निर्णय लेने के बजाय बाजार की स्थिति पर नजर रखते हुए धैर्य बनाए रखना चाहिए। तकनीकी विश्लेषण के अनुसार निफ्टी के लिए 22,500 का स्तर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।





