छत्तीसगढ़ के Raigarh जिले में प्रस्तावित एयरपोर्ट परियोजना को लेकर प्रभावित गांवों के ग्रामीणों ने प्रशासन से उचित मुआवजा और पुनर्वास की मांग की है। बड़ी संख्या में लोग जिला मुख्यालय पहुंचकर कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों का कहना है कि Raigarh Airport Expansion परियोजना के तहत यदि उनकी जमीन और मकान अधिग्रहित किए जाते हैं, तो उन्हें शासन के नियमों के अनुसार न्यायसंगत मुआवजा दिया जाना चाहिए।
भूमि अधिग्रहण से कई गांवों पर पड़ेगा असर
पुसौर क्षेत्र के गांवों के निवासियों का कहना है कि एयरपोर्ट विस्तार के लिए जमीन की नापजोख की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इस प्रक्रिया के तहत खेत, मकान, बाड़ी और अन्य संपत्तियां प्रभावित होने की आशंका है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि अधिग्रहण होता है तो Land Acquisition Compensation के तहत मौजूदा बाजार मूल्य के आधार पर चार गुना मुआवजा दिया जाना चाहिए।
सैकड़ों परिवारों के प्रभावित होने की आशंका
ग्रामीणों के अनुसार पुसौर तहसील के ग्राम औरदा सहित आसपास के क्षेत्रों में कई परिवार वर्षों से बसे हुए हैं और कृषि पर निर्भर हैं। एयरपोर्ट परियोजना के विस्तार के कारण करीब 150 से अधिक मकान प्रभावित हो सकते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह Airport Development Project क्षेत्र के विकास के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है, लेकिन प्रभावित परिवारों की सुरक्षा और पुनर्वास भी उतना ही जरूरी है।
पुनर्वास के साथ बुनियादी सुविधाओं की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि यदि उन्हें स्थानांतरित किया जाता है तो उसी पंचायत क्षेत्र में जमीन आवंटित कर मकान बनाने की व्यवस्था की जाए। साथ ही नए स्थान पर तालाब, बिजली, पेयजल, स्कूल, आंगनबाड़ी और अस्पताल जैसी सुविधाएं भी सुनिश्चित की जाएं। ग्रामीणों का कहना है कि उचित Rehabilitation Policy लागू होने के बाद ही वे भूमि अधिग्रहण को लेकर सहमति देंगे।
पुरानी योजना को अब मिल रही गति
जानकारी के अनुसार कोड़ातराई क्षेत्र में पहले से मौजूद एयर स्ट्रिप को विकसित करने की योजना कई वर्षों पहले बनाई गई थी। राज्य सरकार और Airports Authority of India के बीच हुए समझौते के तहत इस हवाई पट्टी को आधुनिक एयरपोर्ट के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव रखा गया था, जिसे अब चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है।
चार गांवों की जमीन परियोजना में शामिल
परियोजना के तहत कोड़ातराई, औरदा, बेलपाली और जकेला गांवों की जमीन चिन्हित की गई है। प्रशासनिक दस्तावेजों के अनुसार इन क्षेत्रों में सैकड़ों किसानों की भूमि एयरपोर्ट परियोजना के लिए प्रस्तावित है। ग्रामीणों का कहना है कि विकास के साथ-साथ प्रभावित परिवारों के हितों का ध्यान रखा जाना भी आवश्यक है।





