सीजी भास्कर, 10 मार्च। सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) की सुनवाई के दौरान उस समय दिलचस्प स्थिति (Supreme Court English Exam Remark) बन गई, जब मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत याचिकाकर्ता पर नाराज हो गए। सुनवाई के दौरान CJI ने याचिकाकर्ता से कहा कि अगर उसने वास्तव में खुद याचिका तैयार की है तो वह अदालत में ही अंग्रेजी की परीक्षा आयोजित करा सकते हैं।
मुख्य न्यायाधीश ने सख्त लहजे में कहा कि अगर परीक्षा में 30 अंक भी नहीं आए, तो अदालत इस याचिका को गंभीरता से नहीं लेगी। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि सच नहीं बताया गया तो भारी जुर्माना और जांच के आदेश भी दिए जा सकते हैं।
CJI ने पूछा क्या आपने खुद तैयार की याचिका?
सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने याचिकाकर्ता से पूछा कि क्या उसने याचिका का ड्राफ्ट खुद तैयार किया है। इस पर याचिकाकर्ता ने दावा किया कि उसने खुद ही यह याचिका बनाई है। जब अदालत ने उसका शैक्षणिक बैकग्राउंड पूछा तो उसने बताया कि वह 12वीं पास है और लुधियाना के एक स्कूल में पढ़ा है। इसके बाद CJI ने कहा कि अगर याचिका वास्तव में उसी ने लिखी है तो अदालत में ही इंग्लिश टेस्ट कराया जाएगा।
AI टूल से तैयार हुई थी याचिका
बहस के दौरान याचिकाकर्ता ने स्वीकार किया कि उसने AI टूल की मदद से सामग्री खोजी और फिर एक टाइपिस्ट से याचिका (Supreme Court English Exam Remark) टाइप करवाई। उसने यह भी बताया कि टाइपिंग के लिए टाइपिस्ट को 1000 रुपये प्रति घंटे दिए गए थे। यह सुनकर अदालत ने सवाल उठाया कि आखिर याचिका का असली ड्राफ्ट किसने तैयार किया।
CJI ने दी सख्त चेतावनी
CJI सूर्यकांत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसा लगता है कि याचिकाकर्ता ने किसी अन्य व्यक्ति के कहने पर अपना नाम इस्तेमाल किया है और एक बेतुकी व गोलमोल याचिका अदालत में दाखिल की गई है।
सुनवाई के अंत में अदालत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट हर बार ऐसी फालतू याचिकाओं पर जांच का आदेश नहीं देता, लेकिन भविष्य में ऐसी याचिका दाखिल करने से बचने की सख्त चेतावनी (Supreme Court English Exam Remark) दी। CJI ने टिप्पणी करते हुए कहा कि अदालत का समय बेहद कीमती है और इसका दुरुपयोग नहीं होना चाहिए।





