त्तीसगढ़ में एक पुराने आपराधिक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए Chhattisgarh High Court ने आरोपी युवक को दोषमुक्त कर दिया है। अदालत ने कहा कि यदि महिला बालिग है और उसकी सहमति से संबंध बने हैं, तो हर परिस्थिति में इसे दुष्कर्म की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। इसी आधार पर निचली अदालत द्वारा दी गई सजा को निरस्त कर दिया गया। यह निर्णय अब (High Court Rape Case Verdict) के रूप में चर्चा में है।
सरगुजा जिले से जुड़ा था मामला
यह मामला Dhaurpur Police Station क्षेत्र से जुड़ा है। जानकारी के अनुसार वर्ष 2000 के आसपास एक छात्रा और युवक के बीच पहले दोस्ती हुई, जो बाद में प्रेम संबंध में बदल गई। दोनों के बीच लंबे समय तक संपर्क बना रहा और युवती ने आरोप लगाया था कि युवक ने शादी का वादा कर संबंध बनाए। हालांकि अदालत ने मामले की परिस्थितियों का विश्लेषण करते हुए इसे (Consent Relationship Case) के रूप में देखा।
लोअर कोर्ट ने सुनाई थी सात साल की सजा
मामले की सुनवाई के बाद Ambikapur की सत्र अदालत ने आरोपी को दोषी मानते हुए सात साल के कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई थी। इस फैसले के खिलाफ आरोपी ने हाईकोर्ट में अपील दायर की। अपील पर सुनवाई के दौरान अदालत ने सबूतों और परिस्थितियों की पुनः समीक्षा की और अंततः (Court Appeal Decision) के तहत निचली अदालत का फैसला रद्द कर दिया।
अदालत ने सहमति और इरादे को माना अहम आधार
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि केवल शादी का वादा करने के आधार पर हर मामले में दुष्कर्म का अपराध सिद्ध नहीं किया जा सकता। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जब तक यह साबित न हो कि आरोपी ने शुरू से ही शादी करने का इरादा नहीं रखा और केवल धोखे से संबंध बनाए, तब तक इसे आपराधिक कृत्य नहीं माना जा सकता। अदालत के अनुसार (Legal Consent Law) के तहत संबंधों की प्रकृति और परिस्थितियों का मूल्यांकन करना आवश्यक होता है।
करीब 20 साल बाद खत्म हुआ कानूनी विवाद
लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद लगभग दो दशक पुराने इस मामले में आखिरकार फैसला आया। अदालत के निर्णय के साथ ही आरोपी को दोषमुक्त कर दिया गया और निचली अदालत का आदेश निरस्त कर दिया गया।





