सीजी भास्कर, 13 मार्च। मजबूत इरादे और सामूहिक प्रयास अगर साथ हों तो सीमित संसाधन भी सफलता की राह खोल (Mahila Samuh Success Story) देते हैं। मध्यप्रदेश के Balaghat जिले के लांजी विकासखंड के ग्राम कुल्पा की महिलाओं ने इसी सोच के साथ आगे बढ़ते हुए आत्मनिर्भरता की मिसाल कायम की है। ‘कृष्णा आजीविका स्व-सहायता समूह’ से जुड़ी 13 महिलाओं ने मिलकर अपने जीवन में आर्थिक और सामाजिक बदलाव की नई कहानी लिखी है।
छोटे कदम से शुरू हुआ सफर
कुछ साल पहले जब इन महिलाओं ने समूह बनाया, तब संसाधन सीमित थे, लेकिन आत्मविश्वास और मेहनत की कमी नहीं थी। नियमित बचत, सामूहिक निर्णय और अनुशासन को आधार बनाकर उन्होंने समूह की गतिविधियों को आगे बढ़ाया। शुरुआती छह महीनों में ब्लॉक स्तर से उन्हें 13 हजार रुपये की चक्रीय निधि मिली, जिससे आर्थिक गतिविधियों की शुरुआत हुई।
इसके बाद बैंक सखी के सहयोग से समूह को पहली सीसीएल के रूप में एक लाख रुपये का ऋण (Mahila Samuh Success Story) मिला। इस राशि को कृषि कार्य में लगाकर महिलाओं ने एक वर्ष के भीतर पूरा ऋण ब्याज सहित वापस कर दिया।
छोटे व्यवसाय से बढ़ी आय
समूह को आगे चलकर दूसरी और तीसरी सीसीएल के रूप में क्रमशः 2 लाख और 3 लाख रुपये का ऋण मिला। इस पूंजी से महिलाओं ने बकरी पालन, जनरल स्टोर, पान दुकान, सब्जी उत्पादन, ऑनलाइन सेवा केंद्र और ट्रैक्टर जैसी गतिविधियां शुरू कीं। इन प्रयासों से न केवल उनकी आय बढ़ी बल्कि गांव में रोजगार के नए अवसर भी बने।
बाद में चौथी सीसीएल के रूप में भी 3 लाख रुपये की सहायता मिली, जिससे इन व्यवसायों का विस्तार किया गया। इसके अलावा ग्राम संगठन से 1 लाख 10 हजार रुपये की CIF राशि भी प्राप्त हुई, जिसका उपयोग कृषि और शिक्षा जैसे कार्यों में किया गया।
कई महिलाओं की आय हजारों में पहुंची
आज इस समूह से जुड़ी कई महिलाएं हर महीने अच्छी आय अर्जित कर रही हैं। कुछ सदस्य 20 से 25 हजार रुपये तक कमा रही हैं, जबकि अन्य महिलाएं बकरी पालन और खेती के जरिए 4 से 5 हजार रुपये की नियमित आय प्राप्त कर रही हैं।
शिक्षा से बदली नई पीढ़ी की राह
समूह की सदस्य नीरा दशहरे की कहानी खास तौर पर प्रेरणादायक मानी (Mahila Samuh Success Story) जा रही है। उन्होंने समूह से मिले सहयोग का उपयोग अपनी बेटियों की पढ़ाई में किया। आज उनकी तीनों बेटियां नौकरी कर रही हैं और परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं।
ग्राम कुल्पा की इन महिलाओं ने यह साबित किया है कि जब महिलाएं संगठित होकर आगे बढ़ती हैं, तो वे न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे समाज में आत्मनिर्भरता और महिला सशक्तिकरण का उदाहरण बन सकती हैं।





