सीजी भास्कर, 13 मार्च। देश की सर्वोच्च अदालत Supreme Court of India ने उस याचिका को खारिज (CJI Dipak Misra Case) कर दिया, जिसमें केंद्र सरकार से एक करोड़ रुपये के भुगतान की मांग की गई थी। याचिका में दावा किया गया था कि वर्ष 2018 में तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश Dipak Misra को कथित तौर पर “बचाने” के लिए छह मामले दायर किए गए थे, जिनके लिए फीस और खर्च की भरपाई मांगी गई थी।
अदालत ने बताया याचिका को गलत आधार वाली
मुख्य न्यायाधीश Surya Kant की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि याचिका पूरी तरह गलत धारणा पर आधारित है। पीठ में जस्टिस Joymalya Bagchi और जस्टिस Vipul M. Pancholi भी शामिल थे।
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि यदि किसी ने संस्थान के हित में सामाजिक सेवा (CJI Dipak Misra Case) की है तो उसकी कीमत पैसों में तय नहीं की जा सकती। अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि सामाजिक सेवा हमेशा अमूल्य होती है और इसे एक या दो करोड़ रुपये में नहीं आंका जा सकता।
लखनऊ के वकील ने दायर की थी याचिका
यह याचिका लखनऊ के अधिवक्ता अशोक पांडे द्वारा दायर की गई थी। उन्होंने Allahabad High Court की लखनऊ पीठ के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उनकी मांग को पहले ही खारिज कर दिया गया था।
याचिकाकर्ता का कहना था कि उन्होंने तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश के समर्थन में छह अलग-अलग मामले दायर किए थे और इसके लिए करीब दो लाख रुपये खर्च किए थे, जो उन्होंने अपनी बेटी से उधार लिए थे।
अदालत ने की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी पूछा कि जब याचिकाकर्ता पहले न्यायाधीशों पर आरोप (CJI Dipak Misra Case) लगा रहे थे, तो अब सम्मानजनक शब्दों का उपयोग क्यों कर रहे हैं। अदालत ने कहा कि अगर उन्होंने संस्थान के लिए कोई काम किया है तो उसे सामाजिक सेवा माना जाएगा। अंत में शीर्ष अदालत ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया।





