▶️ बिना निविदा के 20 जिलों में खरीदी और बाजार दर से 35% अधिक भुगतान का मामला गरमाया
▶️ शिकायतकर्ता का दावा : खाद्य विभाग के संरक्षण में फल-फूल रहा भ्रष्टाचार, सूचना के अधिकार में जानकारी देने से इनकार
सीजी भास्कर, 18 मार्च। छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी विपणन संघ (मार्कफेड) और खाद्य विभाग एक बार फिर धान संग्रहण के लिए उपयोग होने वाले प्लास्टिक कैप कव्हर की खरीदी (Markfed Scam Chhattisgarh) में हुए कथित बड़े भ्रष्टाचार को लेकर घेरे में है। आरोप है कि जैम (GeM) पोर्टल और पक्षपातपूर्ण निविदा शर्तों का सहारा लेकर शासन को करोड़ों रुपये का चूना लगाया जा रहा है।
बिना निविदा के अतिरिक्त खरीदी का खेल
जितेंद्र शर्मा की शिकायत के अनुसार, वर्ष 2024-25 में विपणन संघ ने केवल 14 जिलों के लिए निविदा बुलाई थी, लेकिन इसकी आड़ में अधिकारियों ने बिना किसी टेंडर प्रक्रिया के अन्य 20 जिलों के लिए 14,815 नग अतिरिक्त कैप कव्हर की खरीदी कर ली। यह सीधे तौर पर वित्तीय नियमों का उल्लंघन है।
दरों में भारी अंतर : तमिलनाडु में सस्ता, छत्तीसगढ़ में महंगा
भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा प्रमाण दरों के अंतर में दिख रहा है। जिस ‘बैगपाली इंटरनेशनल’ (हरियाणा) ने तमिलनाडु सरकार को यही कैप कव्हर 9 हजार 390 रुपये प्रति नग में सप्लाई (Markfed Scam Chhattisgarh) किया, उसी कंपनी से छत्तीसगढ़ विपणन संघ ने 12 हजार 685 रुपये की दर पर खरीदी की। अधिक परिवहन लागत के बावजूद तमिलनाडु में दरें कम होना, छत्तीसगढ़ में हुई खरीदी की शुचिता पर बड़े सवाल खड़े करता है।
रिंग बनाने वाली दोषी कंपनियों पर मेहरबानी
चौंकाने वाला तथ्य यह है कि जिन फर्मों से खरीदी की गई, उन्हें भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) द्वारा पूर्व में गुटबंदी (Cartel/Ring formation) का दोषी ठहराया जा चुका है। इसके बावजूद, विपणन संघ ने उन्हीं कंपनियों को प्राथमिकता दी।
शिकायतकर्ता के गंभीर आरोप
शिकायतकर्ता जितेंद्र कुमार शर्मा ने सीधे तौर पर खाद्य विभाग के उच्च अधिकारियों पर संलिप्तता के आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि इस भ्रष्टाचार को विभाग का स्पष्ट संरक्षण (Markfed Scam Chhattisgarh) प्राप्त है। यही कारण है कि RTI के तहत जानकारी देने से मना किया गया है। पिछले वर्ष की शिकायतों पर कार्रवाई न होने से अधिकारियों के हौसले बुलंद हैं और इस वर्ष भी 12 हजार 883 रूपये जैसी ऊँची दरों पर निविदाएं खोलकर शासन को नुकसान पहुँचाने की तैयारी है।
कम दरों वाले प्रस्तावों की अनदेखी
जानकारी यह भी है कि ‘प्रज्ञा पॉलीमर’ जैसी कंपनियों ने 9 हजार 580 रूपये में आपूर्ति का प्रस्ताव दिया था और पक्षपातपूर्ण शर्तों में सुधार का आग्रह किया था, जिसे प्रबंध संचालक ने सिरे से खारिज कर दिया।
वर्तमान में जैम पोर्टल पर प्राप्त दरें बाजार मूल्य से लगभग 35 प्रतिशत अधिक हैं, जो स्पष्ट रूप से मिलीभगत की ओर इशारा करती हैं।
विपणन संघ और खाद्य विभाग की इस कार्यप्रणाली से न केवल सरकारी धन का दुरुपयोग हो रहा है, बल्कि पारदर्शी निविदा प्रक्रिया की भी धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।





