सीजी भास्कर, 24 मार्च। जिले के सरकारी अस्पताल से एक चौंकाने वाली लापरवाही सामने (Lizard Found In Water Cooler) आई है, जिसने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अस्पताल के वाटर कूलर में दो मरी हुई छिपकलियां मिलने से मरीजों और परिजनों के बीच हड़कंप मच गया। यह वही पानी था, जिसे रोजाना सैकड़ों लोग पी रहे थे – यानी अनजाने में लोग खतरे को ही निगल रहे थे।
पानी पीने वालों में डर, अस्पताल में अफरा-तफरी
घटना का खुलासा होते ही अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। मरीजों और उनके परिजनों ने साफ-सफाई को लेकर नाराजगी जताई और जिम्मेदारों पर लापरवाही के आरोप लगाए। लोगों का कहना है कि अस्पताल में नियमित निगरानी और सफाई की व्यवस्था कागजों तक ही सीमित है, जमीनी हकीकत कुछ और है।
विरोध में उतरे छात्र और युवा कार्यकर्ता
मामले की जानकारी मिलते ही NSUI और Indian Youth Congress के कार्यकर्ता अस्पताल (Lizard Found In Water Cooler) पहुंचे। उन्होंने परिसर में धरना देकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की। प्रदर्शन के दौरान नारेबाजी भी हुई, जिससे कुछ देर के लिए माहौल और गरम हो गया।
प्रशासन ने तत्काल संभाली स्थिति
घटना की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। वाटर कूलर की तत्काल सफाई करवाई गई और उसमें नया पानी भरवाया गया। साथ ही अधिकारियों ने पूरे मामले की जांच के निर्देश दिए हैं, ताकि ऐसी लापरवाही दोबारा न हो।
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स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने जताई चिंता
विशेषज्ञों के अनुसार, अगर पानी में छिपकली जैसी जीव-जंतु मर जाएं, तो वह पानी जहरीला हो सकता है। इससे उल्टी, दस्त, फूड पॉइजनिंग जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। ऐसे में यह मामला सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि लोगों की सेहत के साथ सीधा खिलवाड़ माना जा रहा है।
व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल
यह घटना एक बार फिर सरकारी अस्पतालों की सफाई और निगरानी व्यवस्था पर सवाल (Lizard Found In Water Cooler) खड़े करती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल की इमारत भले ठीक दिखती हो, लेकिन अंदर की व्यवस्था अक्सर बदहाल रहती है।
जांच के निर्देश, जिम्मेदारी तय होने का इंतजार
फिलहाल प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है और जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही जा रही है। अब देखना होगा कि इस गंभीर लापरवाही पर कितनी सख्ती दिखाई जाती है।


