सीजी भास्कर, 31 मार्च। छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में नक्सल विरोधी अभियान के बीच सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता (Dantewada Naxal Surrender) मिली है। पांच नक्सलियों ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर हिंसा का रास्ता छोड़ दिया है। इन सभी पर कुल 9 लाख रुपये का इनाम घोषित था। यह सरेंडर न केवल सुरक्षा एजेंसियों की रणनीति की सफलता को दर्शाता है, बल्कि माओवादी संगठन की कमजोर होती पकड़ की भी ओर इशारा करता है।
सरेंडर के बाद खुला बड़ा राज
पुलिस के मुताबिक, आत्मसमर्पण के बाद जब इन नक्सलियों से पूछताछ की गई तो कई अहम जानकारियां सामने आईं। इसी इनपुट के आधार पर सुरक्षा बलों ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 40 हथियार बरामद किए हैं। इनमें एसएलआर, इंसास रायफल, कार्बाइन, .303 रायफल और बीजीएल लॉन्चर जैसे अत्याधुनिक हथियार शामिल हैं। इन हथियारों की बरामदगी को माओवादी संगठन के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि इससे उनकी सैन्य ताकत पर सीधा असर पड़ेगा।
दंडकारण्य नेटवर्क से जुड़े थे नक्सली
आत्मसमर्पण करने वाले सभी नक्सली दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी के पश्चिम बस्तर डिवीजन (Dantewada Naxal Surrender) से जुड़े हुए थे। इनमें एक एरिया कमेटी सदस्य (ACM) भी शामिल है, जो संगठन में अहम भूमिका निभाता था। इन सभी ने दंतेवाड़ा पुलिस लाइन कारली में “पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन” योजना के तहत मुख्यधारा में लौटने का फैसला लिया। यह योजना नक्सलियों को हिंसा छोड़कर सामान्य जीवन अपनाने के लिए प्रेरित करती है।
बड़े अधिकारियों की मौजूदगी में हुआ सरेंडर
इस मौके पर आईजी बस्तर रेंज, डीआईजी सीआरपीएफ, कलेक्टर और एसपी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने बताया कि लगातार चलाए जा रहे ऑपरेशन और पुनर्वास नीति के कारण नक्सली संगठन कमजोर पड़ रहा है। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 से अब तक 607 माओवादी आत्मसमर्पण कर चुके हैं, जबकि 54 मारे गए और 92 को गिरफ्तार किया गया है। ये आंकड़े साफ बताते हैं कि नक्सल विरोधी अभियान अब निर्णायक चरण में पहुंच रहा है।
पुनर्वास योजना से बदल रही तस्वीर
आईजी बस्तर रेंज ने बताया कि सरेंडर करने वाले युवाओं को सरकार की ओर से सुरक्षा, रोजगार और सम्मानजनक जीवन का अवसर दिया (Dantewada Naxal Surrender) जा रहा है। यही वजह है कि अब अधिक से अधिक नक्सली मुख्यधारा में लौटने के लिए आगे आ रहे हैं। यह पहल न सिर्फ हिंसा को कम करने में मदद कर रही है, बल्कि क्षेत्र में विकास और शांति की दिशा में भी बड़ा कदम साबित हो रही है।
बस्तर में कमजोर पड़ रहा नक्सल नेटवर्क
लगातार सरेंडर, गिरफ्तारी और एनकाउंटर के चलते बस्तर क्षेत्र में नक्सली नेटवर्क कमजोर होता नजर आ रहा है। सुरक्षा बलों की रणनीति अब सिर्फ ऑपरेशन तक सीमित नहीं है, बल्कि पुनर्वास और विश्वास जीतने पर भी फोकस किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इसी तरह अभियान जारी रहा, तो आने वाले समय में बस्तर पूरी तरह नक्सल प्रभाव से मुक्त हो सकता है।


